'लेटिन अमेरिका 2010 में पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक'

समाचार एजेंसी ईएफई के अनुसार मेक्सिको इस क्षेत्र का सबसे खतरनाक देश रहा। यहां 14 पत्रकारों की हत्याएं हुईं। पाकिस्तान में भी इस अवधि के दौरान इतने ही पत्रकारों की हत्याएं हुईं।

इस क्षेत्र का दूसरा सबसे खतरनाक देश होंदुरास रहा। यहां इस वर्ष प्रेस पर हुए हमलों में नौ पत्रकार मारे गए। इराक में भी इस दौरान इतने ही पत्रकार मारे गए।

पीईसी के अनुसार इस क्षेत्र में प्रेस पर खतरे के मामले में सातवां सबसे खतरनाक देश कोलम्बिया रहा। इस वर्ष यहां चार पत्रकारों की हत्याएं हुईं। जबकि फिलीपींस में छह पत्रकार मारे गए थे और रूस में पांच पत्रकारों की हत्याएं हुई थीं। लेकिन ब्राजील और नाइजीरिया में इस दौरान कोलम्बिया जितने ही पत्रकार मारे गए हैं।

पीईसी के महासचिव ब्लेज लेम्पन ने कहा, "पत्रकारों की हत्या महामारी का रूप अख्तियार कर चुकी है और यह रुकने का नाम नहीं ले रही। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को न तो इसका कोई समाधान मिल पाया है, और न ऐसी कोई प्रभावी प्रक्रिया ही तैयार हो पाई है, जिससे कि पत्रकारों के खिलाफ अपराध करने वालों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके।"

पीईसी ने पांच वर्ष पहले जब से आंकड़े जुटाने शुरू किए हैं, तब से अब तक 529 पत्रकार अपने पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए अपनी जिंदगी कुर्बान कर चुके हैं।

इस अवधि के दौरान पत्रकारों की हत्या के मामले में इराक दुनिया का सबसे खतरनाक देश रहा है। वहां कुल 127 पत्रकारों की हत्याएं हुईं। उसके बाद 59 और 47 हत्याओं के साथ फिलीपींस और मेक्सिको क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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