पेशी पर प्रधानमंत्री ने किया आश्वासन पूरा, अब जोशी की बारी (राउंडअप)

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराने की विपक्षी दलों की मांग के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पीएसी अध्यक्ष व वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी को लिखे एक पत्र में कहा कि हालांकि पीएसी के समक्ष किसी प्रधानमंत्री के पेश होने की मिसाल नहीं है लेकिन वह ऐसा करने के लिए तैयार हैं।

पत्र में मनमोहन सिह ने कहा, "मेरी जानकारी के मुताबिक पीएसी विभिन्न विभागों के सचिवालयों या विभिन्न विभाग प्रमुखों या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से सबूत जुटाती है।"

उन्होंने लिखा, "यह भ्रांति फैलाई जा रही है कि प्रधानमंत्री पूछताछ के लिए संसद की किसी समिति के सामने पेश नहीं होना चाहते। मैं आपको यह जानकारी देना चाहता हूं कि यदि लोक लेखा समिति प्रधानमंत्री से स्पष्टीकरण लेना चाहे तो मैं समिति के समक्ष पेश होने के लिए तैयार हूं। जबकि अभी तक ऐसी कोई मिसाल नहीं रही है कि कोई प्रधानमंत्री पीएसी के समक्ष पेश हुए हों।"

प्रधानमंत्री ने लिखा, "जैसा आप जानते हैं कि लोक लेखा समिति ने 2जी और 3जी स्पेक्ट्रम आवंटन के सम्बन्ध में प्रधानमंत्री और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के बीच और प्रधानमंत्री कार्यालय एवं दूरसंचार विभाग के बीच हुए पत्र व्यवहार की प्रतियों की मांग की है।"

प्रधानमंत्री ने लिखा, "मैं समझता हूं कि समिति को सभी संबंधित दस्तावेज भेजे गए हैं।"

उल्लेखनीय है कि एक सप्ताह पहले प्रधानमंत्री ने कांग्रेस महाधिवेशन में कहा था कि उन्हें लोक लेखा समिति के सामने पेश होने में खुशी होगी। प्रधानमंत्री ने इस सम्बंध में जोशी को पत्र लिखने की इच्छा व्यक्त की थी।

उन्होंने कहा था, "मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि मेरे पास जनता से छुपाने लायक कुछ नहीं है और जहां तक इसकी प्रमाणिकता का सवाल है तो मैं पीएसी के अध्यक्ष को पत्र लिखूंगा कि यदि समिति चाहे तो मैं उसके समक्ष पेश होने के लिए तैयार हूं।"

प्रधानमंत्री के इस प्रस्ताव पर जोशी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "इस बारे में उचित समय पर कोई उचित निर्णय लिया जाएगा। हम प्रधानमंत्री के पत्र का गहराई से अध्ययन करेंगे और उसके बाद आगे की कार्रवाई के बारे में निर्णय लेंगे।"

जोशी ने कहा, "पीएसी को प्रधानमंत्री का पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें उन्होंने जरूरत पड़ने पर पीएसी के समक्ष पेश होने के अपने प्रस्ताव को दोहराया है। जिन दस्तावेजों की मांग की गई थी, उनके कार्यालय ने सौंप दिए थे।"

उन्होंने कहा, "हमें उनकी तरफ से कई सरकारी दस्तावेज प्राप्त हुए हैं। हम उनकी समीक्षा कर रहे हैं। इन दस्तावेजों को पढ़ने में वक्त लगेगा।"

इससे पहले, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) विनोद राय इस मामले पर अपनी रिपोर्ट के सम्बन्ध में विचार-विमर्श के लिए पीएसी के समक्ष पेश हुए।

इस बारे में जोशी ने कहा, "सीएजी ने बताया है कि रिपोर्ट में सिर्फ आंकड़ों पर ही गौर नहीं किया गया है, बल्कि यह भी ध्यान दिया गया है कि नीतियों का अनुपालन ठीक तरीके से हुआ है कि नहीं।"

16 नवम्बर को संसद में पेश की गई सीएजी की 96 पृष्ठ की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2008 में किए गए 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन से देश को 1,76,645 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।

बहरहाल, भाजपा ने प्रधानमंत्री की इस कवायद को अनावश्यक बताया है। पार्टी ने स्पष्ट कहा है कि प्रधानमंत्री पीएसी के समक्ष उपस्थित हों या फिर कहीं और, वह जेपीसी की अपनी मांग छोड़ने को तैयार नहीं है।

प्रधानमंत्री की इस पेशकश पर पार्टी की प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने संवाददाताओं से कहा, "प्रधानमंत्री कहीं भी जाए.. जब तक जेपीसी जांच नहीं होती तब तक इसका कोई मतलब नहीं होता है।"

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री यदि साफ-सुथरे हैं तो वह जेपीसी से क्यों भाग रहे हैं। सरकार को जेपीसी की मांग स्वीकार कर लेनी चाहिए।"

भाजपा के इस रवैये की कांग्रेस ने आलोचना करने में भी देरी नहीं लगाई। पार्टी ने कहा है कि पीएसी के अध्यक्ष भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी हैं। ऐसे में भाजपा द्वारा जेपीसी मांग पर अड़े रहने का मतलब है कि उसे उनकी क्षमताओं पर विश्वास नहीं है।

कांग्रेस प्रवक्ता शकील अहमद ने कहा, "आज प्रधानमंत्री ने खुद कहा है कि वह पीएसी के समक्ष उपस्थित होने को तैयार हैं..भाजपा को यदि जोशी और पीएसी की क्षमताओं पर भरोसा नहीं है तो हम इसमें उसकी कुछ भी मदद नहीं कर सकते।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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