तेलंगाना क्षेत्र के 11 कांग्रेसी सांसद अनशन पर (लीड-1)

हैदराबाद, 27 दिसम्बर (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश में अपनी ही पार्टी की सरकार को शर्मिदा करते हुए तेलंगाना क्षेत्र के 11 कांग्रेसी सांसदों ने सोमवार को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। वे अलग राज्य के लिए चलाए गए अभियान में भाग लेने वालों के खिलाफ मुकदमे वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री एन. किरण रेड्डी सहित पार्टी नेताओं की अपील को नजरअंदाज करते हुए कांग्रेसी सांसदों ने 'न्यू एमएलए क्वार्टर्स' पर भूख हड़ताल शुरू कर दी। इससे पहले वे राज्य विधानसभा के सामने स्थित गुण पार्क में बैठे थे, जहां से पुलिस ने उन्हें हटा दिया।

सभी सांसद दो घंटे के लिए गुण पार्क में तेलंगाना शहीद मेमोरियल पर बैठ गए और उन लोगों को श्रद्धांजलि दी जिनकी पृथक तेलंगाना आंदोलन के दौरान मौत हो गई थी। वे हाथों में मांग लिखी तख्तियां लिए हुए थे और 'हमें न्याय चाहिए' जैसे नारे लगा रहे थे।

पुलिस के यह कहने पर कि निषेधाज्ञा के कारण वे इस इलाके में भूख हड़ताल नहीं कर सकते, सांसद 'न्यू एमएलए क्वार्टर्स' चले गए।

तेलंगाना संयुक्त कार्य समिति के संयोजक एम.कोडंदरम, नक्सल समर्थक एवं तेलंगाना प्रजा फंट्र के नेता गदर, तेलंगाना क्षेत्र के सरकारी कर्मचारियों के नेता तथा वकीलों के संगठनों ने भूख हड़ताल पर बैठे सांसदों से मुलाकात कर एकता प्रकट की।

न्यायमूर्ति बी.एन. श्रीकृष्णा समिति की रिपोर्ट आने से पहले भूख हड़ताल पर नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री ने तेलंगाना क्षेत्र के दो मंत्रियों को सांसदों से बात करने की जिम्मेदारी सौंपी तथा भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की।

उल्लेखनीय है कि अलग तेलंगाना राज्य गठन से जुड़े मुद्दों पर विचार के लिए गठित श्रीकृष्णा समिति अपनी रिपोर्ट 31 दिसम्बर को सौंपेगी।

मुख्यमंत्री ने मंत्रियों के जरिए यह बताया है कि सरकार प्रदर्शनकारियों पर लगे अन्य 132 मुकदमे वापस लेने को तैयार है।

किरण कुमार ने तेलंगाना क्षेत्र के मंत्रियों, मुख्य सचिव एस.वी. प्रसाद और पुलिस महानिदेशक अरविंद राव के साथ बैठक कर मुकदमे वापस लेने पर विचार-विमर्श किया।

राज्य सरकार ने पहले ही 2,436 लोगों में से 562 पर से मामला हटा लिया है, जिन्होंने अलग तेलंगाना राज्य के लिए हुए प्रदर्शनों में भाग लिया था।

ज्ञात हो कि दिसम्बर 2009 और इस वर्ष सितम्बर के बीच 8,047 लोगों के खिलाफ कुल 1,667 मामले दर्ज किए गए हैं।

मुख्यमंत्री के अलावा कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष डी. श्रीनिवास ने भी अनशन पर बैठने वाले तेलंगाना क्षेत्र के 11 सांसदों से सरकार को शर्मिदा न करने की अपील की थी। इसके बावजूद सांसदों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी।

वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य के. केशव के नेतृत्व में सभी सांसदों ने अनशन पर बैठने से पहले विधानसभा में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

राव ने कहा कि 21 विधायक एवं अन्य नेता भी भूख हड़ताल में शामिल हो रहे हैं।

उन्होंने कहा, "विरोध के लिए गांधीवादी तरीका अपनाया गया है। यह खुद को कष्ट पहुंचाना है और इससे सरकार पर नैतिक दबाव बढ़ेगा।"

एक अन्य सांसद पी.प्रभाकर ने संवाददाताओं से कहा कि भूख हड़ताल तेलंगाना क्षेत्र के लोगों में लोकतंत्र में विश्वास बहाली के लिए की गई है। इससे क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी भी बची रहेगी।

सांसदों ने केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदम्बरम के उस वादे की याद दिलाई जिसमें उन्होंने नौ दिसम्बर 2009 को घोषणा की थी कि मामलों को वापस ले लिया जाएगा।

सांसदों ने मुख्यमंत्री के सामने यह भी मांग रखी है कि राज्य सरकार के आग्रह पर तेलंगाना क्षेत्र में तैनात किए गए अर्धसैनिक बलों को वापस बुलाया जाए।

दरअसल, राज्य सरकार ने श्रीकृष्णा समिति की रिपोर्ट आने के बाद गड़बड़ी फैलने की आशंका से सुरक्षा बलों को तैनात किया है।

केशव राव ने कहा, "जब उस क्षेत्र में किसी तरह कि हिंसक गतिविधियां नहीं हो रहीं हैं तब अर्धसैनिक बलों को वहां रखे जाने का क्या औचित्य है।"

उल्लेखनीय है कि लोकसभा में तेलंगाना क्षेत्र के 12 सांसदों में से आठ इस भूख हड़ताल में शामिल हैं। पार्टी के चार राज्यसभा सदस्यों में से तीन विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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