'भारी पेलोड के कारण उपग्रह प्रक्षेपण हुआ विफल'

बेंगलुरू, 27 दिसम्बर (आईएएनएस)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक पूर्व वैज्ञानिक ने कहा कि क्रिसमस के दिन प्रक्षेपित किए गए रॉकेट के विफल होने का प्रमुख कारण पेलोड का अधिक भार हो सकता है।

वैज्ञानिक को रॉकेट मोटर के क्षेत्र में 20 सालों से अधिक का अनुभव है। पहचान जाहिर न करने की शर्त पर उन्होंने कहा कि रॉकेट के विफल होने का उनका तर्क इसरो द्वारा बताए गए तर्क से मेल नहीं खाता, जिसमें कहा गया था कि जीएसएलवी रॉकेट का एक तार टूट जाने के कारण अभियान विफल हो गया।

इसरो के अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने प्रक्षेपण के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि धरती पर कम्प्यूटर से उड़ान के पहले चरण में संदेश पहुंचाने वाला तार टूट गया। जिसके बाद रॉकेट की चाल भटक गई और इसका नष्ट होना तय हो गया।

उन्होंने हालांकि यह नहीं बताया कि यह तार टूटा क्यों। बिना कोई अधिक विवरण दिए उन्होंने बस इतना कहा कि जीएसएलवी-एफ06/जीसेट-5पी अभियान विफल हो गया।

इसरो के पूर्व वैज्ञानिक ने भी माना कि तार टूट गया था। उन्होंने हालांकि यह नहीं माना कि इसके कारण प्रक्षेपण विफल हुआ। उनका कहना है कि रॉकेट पहले टूटा और उसके बाद उसके कारण तार टूटी।

पूर्व वैज्ञानिक ने आईएएनएस से कहा कि रॉकेट के टूटने का कारण उपग्रह का भारी होना हो सकता है।

उनके अनुसार जीएसएलवी रॉकेट पर ले जाया जा रहा जीसेट-5पी दूरसंचार उपग्रह इस रॉकेट पर ले जाया जाने वाला अब तक का सबसे भारी उपग्रह था। इसका कुल भार 2,310 किलोग्राम था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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