नए सुरक्षा उपायों से सुरक्षित बनेगी ऑनलाइन बैंकिंग

ऑनलाइन बैंकिंग व्यवस्था की शुरुआत 30 साल पहले जर्मनी में हुई थी। इसके तहत वब्र्राउचरबैंक एजी ने लोगों को कम्प्यूटर के जरिए नकद हस्तांतरण की सुविधा उपलब्ध कराई थी।

इस व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए पिन नम्बर (निजी पहचान संख्या) का उपयोग किया जाता है लेकिन इसके बावजूद फर्जी तरीके से पैसा निकाले जाने की घटनाएं बढ़ रही हैं।

इससे बचने के लिए बैंकों ने कई तरह की नई विशेष संख्या आवंटित की हैं जिससे फर्जीवाड़े में कमी की गई है लेकिन इस व्यवस्था से भी धोखाधड़ी से पूरी तरह सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है।

वर्ष 2009 में जर्मन पुलिस ने ऑनलाइन बैंक खातों में धोखाधड़ी के 2,900 मामले दर्ज किए हैं। वर्ष 2010 में इन मामलों की संख्या दोगुनी होने का अनुमान है।

बैंक अब उपभोक्ताओं को पिन नम्बर मोबाइल फोन के जरिए उपलब्ध कराने पर विचार कर रहे हैं जिससे मुद्रित रूप में इन्हें उपलब्ध कराने की आवश्यकता खत्म हो जाएगी।

जर्मनी के पोस्टबैंक के प्रवक्ता जर्गन एबर्ट का कहना है, "कागजी रूप में नम्बर उपलब्ध कराने की व्यवस्था अब खत्म होने वाली है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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