छापे के बाद डाबर नेपाल पर मुकदमा
काठमांडू, 27 दिसम्बर (आईएएनएस)। नेपाल में डाबर इंडिया की स्वतंत्र कम्पनी का दुर्भाग्य पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रहा है। कम्पनी के खिलाफ सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है। अभी एक सप्ताह पहले कम्पनी के एक गोदाम पर राज्य सतर्कता विभाग ने छापा मारा था।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश भरत उप्रेती सोमवार को इस याचिका पर सुनवाई करने वाले थे, जिसमें मांग की गई थी कि कथित रूप से खराब गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने के लिए डाबर नेपाल का उत्पादन लाइसेंस रद्द कर दिया जाए।
यह याचिका दक्षिणी नेपाल के बीरगंज निवासी भूषण गिरि द्वारा रविवार को दायर की गई थी। जबकि सतर्कता विभाग के अधिकारियों ने पिछले सोमवार को डाबर नेपाल के गोदाम पर छापा मारा था और रियल ब्रांड वाले फल जूस से भरे 74,000 ऐसे डिब्बे बरामद किए थे, जिन पर उत्पादन की बाद की तारीखों वाले लेबल लगे हुए थे।
इन डिब्बों की कीमत आठ करोड़ नेपाली रुपये ठहरती है। इन डिब्बों को कमीशन फॉर इनवेस्टिगेशन ऑफ अब्यूज ऑफ अथारिटी (सीआईएए) द्वारा जब्त कर लिया गया था। सीआईएए ने राजस्व जांच विभाग के साथ मिल कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
गिरि की याचिका में कहा गया है कि छापे के बाद अब प्रधानमंत्री, वाणिज्य मंत्री, उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री और सीआईएए से उचित प्रतिक्रिया आनी चाहिए, क्योंकि छापे से इस बात का खुलासा हुआ है कि 74,000 डिब्बे पर जनवरी 2011 की उत्पादन तिथि दर्ज थी। इसके साथ ही डाबर नेपाल का लाइसेंस रद्द कर दिया जाना चाहिए।
गिरि की याचिका में डाबर का रियल फ्रूट जूस पीने से बीमार हुए लोगों के बारे में आई खबरों का भी जिक्र किया गया है।
पिछले सप्ताह पुलिस ने कहा था कि वह काठमांडू के पूर्व में 26 किलोमीटर दूर स्थित बानेपा में घटी एक घटना की जांच कर रही है। उस घटना में रियल जूस पीने के बाद पांच महिलाएं बीमार हो गई थीं।
यद्यपि शीर मेमोरियल अस्पताल में चक्कर आने की शिकायत के बाद भर्ती किए गए एक परिवार के चार सदस्यों और उनके अतिथियों के बारे में चिकित्सकों ने कहा है कि विषाक्त भोजन का कोई संकेत नहीं है। लेकिन डाबर नेपाल लगातार विवादों में बना हुआ है।
डाबर का दुर्भाग्य चार महीने पहले उस समय शुरू हुआ, जब मीडिया के एक वर्ग ने रियल ब्रांड के खिलाफ लगातार अभियान चलाया। मीडिया ने कहा था कि रियल ब्रांड के डिब्बों में कीड़े और अन्य अखाद्य सामग्री पाई गई थी।
सर्वोच्च न्यायालय के वाद अधिकारी श्रीकांत पौडल ने आईएएनएस को बताया कि समयाभाव के कारण सर्वोच्च न्यायालय, सोमवार को डाबर नेपाल के खिलाफ याचिका की सुनवाई नहीं कर सका।
पौडल ने कहा, "यह याचिका सुनवाई के लिए 10वें स्थान पर थी और इस पर सुनवाई सम्भवत: नहीं हो पाएगी। सुनवाई के लिए कोई दूसरी तारीख तय की जाएगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications