'बेनजीर हत्या मामले में सबूत न के बराबर'
समाचार पत्र 'डान' ने अपने सम्पादकीय में लिखा है, "..बेनजीर भुट्टो रावलपिंडी के लियाकत बाग में आयोजित एक रैली के बाद हुए एक संगठित आतंकी हमले की शिकार हुईं। मामले की ठीक से जांच करने में पैदा होने वाले भ्रम के साथ अपराध की गम्भीरता की तुलना से इंकार कर पाना कठिन है।"
ज्ञात हो कि भुट्टो की 27 दिसम्बर, 2007 को उस समय हत्या कर दी गई थी, जब वह रावलपिंडी के लियाकत बाग में एक चुनावी रैली को सम्बोधित कर कार में सवार होकर वहां से जा रही थीं। उस घटना के सीसीटीवी फूटेज में एक किशोर निशानेबाज भुट्टो के सिर पर निशाना साधे दिखाई देता है। उसके बाद वहां एक शक्तिशाली आत्मघाती विस्फोट हुआ था और कम से कम 24 लोग मारे गए थे।
आंतरिक मंत्रालय ने उस समय भुट्टो की हत्या की साजिश रचने के लिए तालिबान को जिम्मेदार ठहराया था, जबकि चिकित्सकों ने कहा था, "भुट्टो का सिर उनके वाहन की छत से तेजी से टकरा गया था, जिसके कारण उनकी मौत हुई थी।"
डान ने लिखा है, "घटना के तीन वर्ष हो रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान के पास अभी भी इस बारे में ठोस सबूत न के बराबर है, कि हत्या को किसने अंजाम दिया या किसने उसकी साजिश रची, या फिर इस अपराध की जांच के कुप्रबंधन के लिए कौन जिम्मेदार है।"
सम्पादकीय में लिखा है कि विभिन्न लोगों पर आरोप लगाया गया है और संयुक्त राष्ट्र की एक तीन सदस्यीय जांच समिति ने अप्रैल में अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, सिवाय इसके कि सेना ने इसे राष्ट्रीय संस्थान को बदनाम करने की एक कोशिश करा दिया। जबकि इस जांच समिति पर सरकार ने 50 लाख डॉलर खर्च किए थे।
अखबार ने कहा है कि इन वर्षो के दौरान कई अन्य समितियां गठित की गईं लेकिन उनके निष्कर्षो को शायद ही कभी सार्वजनिक किया गया। डान ने कहा है, "समय-समय पर जांच के जो सम्भावित रास्ते सामने आए हैं, वे हमें कहीं नहीं ले जा सके।"
आंतरिक मंत्रालय ने कहा है कि उसने पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को प्रश्नों की सूची भेजी है, लेकिन "कोई भी इस बारे में जानने को उत्सुक है कि क्या उनके एक भी जवाब की जानकारी जनता को होगी, क्या वह वाकई में इस मामले में सहयोग करते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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