गुर्जरों के विरोध प्रदर्शन से अजमेर में बंद
शहर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और संवेदनशील इलाकों में पुलिसकर्मी लगातार गश्त कर रहे हैं। हिंसा की कोई घटना नहीं हुई है।
एक पुलिस अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, "पुलिस पूरे जिले में निगरानी कर रही है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में हैं।"
सोमवार को भरतपुर जिले में बयाना के करीब गुर्जरों द्वारा रेलमार्ग बाधित किए जाने से दिल्ली, मुम्बई के अलावा कई अन्य मार्गो की रेल सेवाएं बाधित हुई हैं।
करीब 15,000 गुर्जरों ने 20 दिसम्बर से यह विरोध प्रदर्शन शुरू किया है। कर्नल (सेवानिवृत्त) के. एस. बैसला के नेतृत्व में गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने बयाना में महापंचायत का आयोजन करके रेल सेवाएं बाधित करने का फैसला लिया था।
इस फैसले के चलते सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने पिलू का पूरा में रेलमार्ग बाधित किया जिससे रेल प्रशासन को कई रेलें रद्द करनी पड़ी और कई का मार्ग परिवर्तित करना पड़ा।
रेलवे प्रशासन ने 600 गुर्जरों पर रेलवे की सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला दर्ज कराया है।
जुलाई 2009 में राजस्थान सरकार ने गुर्जरों को पांच प्रतिशत और अन्य आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गो को 14 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की थी इससे प्रदेश में सभी वर्गो के लिए कुल आरक्षण 68 प्रतिशत पर पहुंच गया।
अक्टूबर 2009 में उच्च न्यायालय ने नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में गुर्जरों और आर्थिक रूप से पिछले वर्गो के लिए दिए गए आरक्षण के फैसले पर रोक लगा दी।
22 दिसम्बर 2010 को उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में नौकरियों में गुर्जरों को दिए गए आरक्षण के फैसले को रद्द कर दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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