तेलंगाना के कांग्रेसी सांसद अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर
ये सांसद पृथक तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर हाल ही में चलाए गए आंदोलन में शामिल होने वालों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री के अलावा कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष डी. श्रीनिवास ने भी अनशन पर बैठने वाले तेलंगाना क्षेत्र के 11 सांसदों से सरकार को शर्मिदा न करने की अपील की थी। इसके बावजूद सांसदों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी।
वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य के. केशव के नेतृत्व में सभी सांसदों ने अनशन पर बैठने से पहले विधानसभा में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इसके बाद सभी सांसद तेलंगाना शहीद मेमोरियल पर उन लोगों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे जिनकी पृथक तेलंगाना आंदोलन के दौरान मौत हो गई थी।
उधर, कांग्रेस के 21 विधायकों और पार्टी के अन्य नेताओं ने 'न्यू एमएलए क्वोर्टर्स' पर औपचारिक तौर पर अपने अनशन की शुरुआत की।
राव ने कहा कि उन्होंने विरोध के लिए गांधीवादी तरीका अपनाया है। यह खुद को कष्ट पहुंचाना है और इससे सरकार पर नैतिक दबाव बढ़ेगा।
सांसदों ने केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदम्बरम के उस वादे की याद दिलाई जिसमें उन्होंने नौ दिसम्बर 2009 को घोषणा की थी कि मामलों को वापस ले लिया जाएगा।
उधर, राज्य के मुख्यमंत्री ने गुरुवार रात को सांसदों से भूख हड़ताल पर न बैठने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि सरकार ने पहले ही 2,431 लोंगों में से 565 लोगों पर से मामला हटा लिया गया है और बाकी लोगों पर से भी चरणबद्ध तरीके से मामले हटाए जाएंगे।
सांसदों ने मुख्यमंत्री के सामने यह भी मांग रखी है कि राज्य सरकार के आग्रह पर तेलंगाना क्षेत्र में तैनात किए गए अर्धसैनिक बलों को वापस बुलाया जाए।
केशव राव ने कहा, "जब उस क्षेत्र में किसी तरह कि हिंसक गतिविधियां नहीं हो रहीं हैं तब अर्धसैनिक बलों को वहां रखे जाने का क्या औचित्य है।"
उल्लेखनीय है कि लोकसभा में तेलंगाना क्षेत्र के 12 सांसदों में से आठ इस भूख हड़ताल में शामिल हैं जबकि केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी और तीन अन्य सांसद व्यक्तिगत कारणों की वजह से इस अनशन में शामिल नहीं हुए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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