अमेरिकी गृह युद्ध के कूट संदेश को पढ़ने में मिली कामयाबी
कांच की शीशी में भेजे गए इस संदेश से विक्सबर्ग में तैनात कन्फेडरेट कमांडर, लेफ्टिनेंट जनरल जॉन पमबर्टन को उस दिन कोई राहत नहीं मिली थी, जिस दिन मिसिसिपी शहर 147 वर्ष पहले अमेरिकी बलों के कब्जे में चला गया था।
छह पंक्तियों के इस संदेश पर चार जुलाई, 1863 की तारीख दर्ज थी। इसी तारीख को पमबर्टन ने उलीसेस एस.ग्रांट के नेतृत्व वाले अमेरिकी बलों के समक्ष हथियार डाला था। और इसके साथ ही विक्सबर्ग की लड़ाई समाप्त हो गई थी। इतिहासकारों के अनुसार गृह युद्ध में यह एक निर्णायक मोड़ था।
ब्रिटिश समाचार पत्र 'डेली मेल' के अनुसार यह संदेश मिसिसिपी नदी के पश्चिमी तट पर तैनात एक कन्फेडरेट कमांडर ने भेजा था।
कन्फेडरेसी से सम्बंधित सामानों के संग्रहालय में प्रबंधक, कैथरीन एम.राइट ने कहा कि कूट संदेश का लेखक कह रहा है, "मैं तुम्हारी मदद नहीं कर सकता। मेरे पास एक भी सैनिक नहीं है, मेरे पास कोई साजोसामान नहीं है, वहां तक पहुंचने का मेरे पास कोई रास्ता नहीं है।" राइट ने कहा है, "यह इस बात का एक दूसरा संकेत था कि परिस्थिति कितनी हताशा भरी और कठिन थी।"
दो इंच से भी कम लम्बी यह शीशी संग्रहालय में 1896 से रखी हुई है। किंग जार्ज काउंटी के कैप्टन विलियम ए.स्मिथ की ओर से दिया गया यह एक उपहार था। स्मिथ ने विक्सबर्ग युद्ध के दौरान अपनी सेवाएं दी थी।
राइट ने इस शीशी की सामग्रियों की जांच करने का निर्णय लिया। शीशी की सामग्रियों में कसावट के साथ लिखी एक टिप्पणी, एक 0.38-कैलिबर का कारतूस और एक सफेद धागा शामिल था।
धागा 61/2 गुणा 21/2 इंच कागज के चारों ओर लिपटा हुआ था, जिसे मोड़कर बोतल में भरा गया था। मुड़े हुए संदेश को अलग किया गया और उसे कागजात दुरुस्त करने वाले विशेषज्ञ के पास ले जाया गया। उसने सफलतापूर्वक मुड़े हुए संदेश की परतों को खोल दिया।
लेकिन संदेश के कूट भाषा को सीआईए के कोड ब्रेकर डेविड गेडी ने पढ़ने में सफलता दर्ज की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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