गुर्जरों और राज्य सरकार के बीच वार्ता बेनतीजा (लीड-1)
आंदोलन का नेतृत्व करने वाले पूर्व कर्नल और गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के समन्वयक के.एस. बैंसला ने कहा कि वह सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं हैं।
बैंसला ने कहा, "हमने संतोषजनक जवाब के लिए सरकार को सात दिनों का समय दिया है, इसके बाद ही हम अपने आंदोलन को समाप्त करने के बारे में सोचेंगे।"
रविवार सुबह राजस्थान के ऊर्जा मंत्री जितेंद्र सिंह जो स्वयं गुर्जर हैं, ने पीलू का पुरा जाकर बैंसला से मुलाकात की। उन्होंने बैंसला से कहा कि राज्य सरकार गुर्जरों को आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन इसमें कुछ समय लग सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार आरक्षण देने में असफल होती है तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। हालांकि वह गुर्जरों को विश्वास में लेने में सफल नहीं हो सके और वार्ता बेनतीजा समाप्त हो गई।
बैंसला से मिलने से पहले सिंह ने बयाना में गुर्जरों के सात सदस्यीय एक शिष्टमंडल से मुलाकात की।
इस बीच राजस्थान में भरतपुर जिले के बयाना में रेल पटरियों पर गुर्जरों द्वारा कब्जा किए जाने से दिल्ली-मुम्बई सहित सवाई माधोपुर-भरतपुर, जयपुर-बांदीकुली, अजमेर-भीलवाड़ा और सवाई माधोपुर-जयपुर के बीच रेलगाड़ियों का संचालन प्रभावित हुआ।
रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "हमने इन इलाकों में सुरक्षा कारणों के चलते रेलगाड़ियों के आवागमन पर रोक लगा दी है।"
आंदोलनकर्ताओं ने बयाना-हिंडन और हिंडन-भरतपुर सड़क मार्गो को भी बंद कर दिया है। जिसके चलते सरकार को इन मार्गो पर चलने वाली अपनी कुछ बसों को स्थगित करना पड़ा है।
ज्ञात हो कि राजस्थान में सरकारी नौकरियों में पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर 15,000 से अधिक गुर्जरों ने सोमवार से आंदोलन शुरू किया है।
उनका नेतृत्व आरक्षण संघर्ष समिति के समन्वयक के.एस. बैंसला कर रहे हैं।
गुर्जर इसके पहले भी वर्ष 2006 और 2008 में उग्र प्रदर्शन कर चुके हैं, इन प्रदर्शनों में कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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