नौ वाद्ययंत्रों को जोड़कर बनाया अनोखा साज
चंदौली (उत्तर प्रदेश), 26 दिसम्बर (आईएएनएस)। संगीत के उस्तादों को आपने कई बार एक साथ दो वाद्ययंत्र बजाते देखा होगा, लेकिन उत्तर प्रदेश के सियाराम नौ वाद्ययंत्रों को एक साथ बजाते हैं। दरअसल, उन्होंने नौ लोक वाद्ययंत्रों को जोड़कर एक संयुक्त वाद्ययंत्र बनाया है। यह वाद्ययंत्र संगीत के नौ साजों की मधुर धुन एक साथ सुनाता है।
चंदौली जिले के भटपुरवा गांव निवासी सियाराम (30) पेशे से किसान हैं। उन्हें यह संयुक्त वाद्ययंत्र बनाने में 14 साल का लम्बा समय लगा। नक्कारा, तबला, ड्रम, झांजा, डमडम, थाली, बोतल, टइयां और नाल को मिलाकर उन्होंने इस अनोखे संयुक्त वाद्ययंत्र को बनाया है। वह इसे हाथों और चोप (छड़ी) से बजाते हैं। वह इस वाद्ययंत्र पर हर धुन आसानी से निकाल लेते हैं।
सियाराम ने आईएएनएस से कहा, "लोग मेरी प्रतिभा और मेरे इस अनोखे संयोजन की सराहना करते हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कहते हैं कि मैंने इसके निर्माण और बजाने की दक्षता हासिल करने में 14 साल बर्बाद कर दिए, लेकिन मैं उनकी बात का बुरा नहीं मानता।"
समारोहों और सामाजिक कार्यक्रमों में लोग सियाराम को यह वाद्ययंत्र बजाते देखकर तब हैरत में पड़ जाते हैं जब उन्हें पता चलता है कि वादक ने पहले कभी संगीत का कोई प्रशिक्षण नहीं लिया है।
वह कहते हैं, "जो लोग मुझ्झे पहली बार देखते हैं, वह भरोसा ही नहीं कर पाते कि मैंने कोई प्रशिक्षण नहीं लिया है। सच कहूं तो जब लोग गलती से मुझे प्रशिक्षित संगीतकार समझ्झकर, बड़े सगीतज्ञों से मेरी तुलना करते हैं तो मुझ्झे बहुत अच्छा लगता है और हौसला भी मिलता है।"
सियाराम का संगीत के प्रति बचपन से ज्यादा लगाव नहीं था। जब वह 12 साल की उम्र में एक थियेटर कम्पनी में काम कर रहे थे, तब उनका संगीत से जुड़ाव हुआ।
अपनी प्रतिभा के चलते सियाराम की पूछ अब इस कदर बढ़ गई है कि लोग शादियों पार्टियों और समारोहों में सियाराम को ही रंग जमाने के लिए आमंत्रित करते हैं।
स्थानीय व्यवसायी गोपाल पांडे कहते हैं, "सियाराम को बजाना देखना अद्भुत अनुभव होता है। मामूली शुल्क में वह पांच घंटे तक लगातार महिफल में जान डाले रहते हैं।"
कालेज छात्र कपिल कुमार कहते हैं, "नौ वाद्ययंत्रों को एक साथ बजाना आसान काम नहीं है। हम सियाराम भैया से रिएलिटी टीवी शो में भाग लेने के लिए कहते हैं। हमें भरोसा है कि एक बार टीवी पर आने के बाद वह पूरे देश में अपनी कला से लोकप्रिय हो जाएंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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