तेलंगाना : कांग्रेसी सांसदों व विधायकों ने दी इस्तीफे की चेतावनी (लीड-1)
तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव द्वारा अलग तेलंगाना राज्य का गठन होने की स्थिति में अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कराने के प्रस्ताव के 24 घंटे के बाद कांग्रेस के इन जनप्रतिनिधियों ने रविवार को यह चेतावनी दी।
चंद्रशेखर के प्रस्ताव के मद्देनजर राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस के तेलंगाना क्षेत्र के नेताओं की रविवार को एक बैठक हुई, जिसमें आगे की रणनीति को लेकर चर्चा हुई। इसी बैठक में अलग राज्य का गठन न होने पर सामूहिक इस्तीफा देने पर सहमति बनी।
ज्ञात हो कि अलग तेलंगाना राज्य के मसले पर गठित श्रीकृष्णा समिति 31 दिसम्बर को अपनी रिपोर्ट सौंपने वाली है।
कांग्रेसी नेताओं ने केंद्र सरकार से मांग की है कि संसद के आगामी बजट सत्र में वह पृथक तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर संसद में विधेयक लाए।
इन नेताओं में नौ सांसद, राज्य सरकार के सात मंत्री, 15 विधायक और चार विधान परिषद सदस्य हैं। इनका स्पष्ट कहना है कि पृथक तेलंगाना राज्य के लिए वे किसी भी बलिदान को तैयार हैं।
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व राज्यसभसा सदस्य केशव राव ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "हम उम्मीद कर रहे हैं कि श्रीकृष्णा समिति की रिपोर्ट पृथक राज्य के गठन के पक्ष में होगी। यदि ऐसा नहीं होता है तो हम सभी अपना इस्तीफा दे देंगे।"
उन्होंने कहा कि सभी सांसद, मंत्री और विधायक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना इस्तीफा सौंपेंगे।
बैठक में यह फैसला भी हुआ कि गत साल और इस वर्ष अलग राज्य को लेकर चले आंदोलनों के दौरान जिन छात्रों पर मामले दर्ज किए किए हैं, वे यदि वापस नहीं लिए जाते तो कांग्रेस सांसद सोमवार से भूख हड़ताल पर बैठेंगे।
सांसद सत्यनारायण सर्वे ने कहा कि यह आमरण अनशन होगा और मामले वापस लेने के लिए सरकार के लिए हमने रविवार शाम तक की समय सीमा निर्धारित की है।
कांग्रेस नेताओं के एक वर्ग का मानना है कि पार्टी को टीआरएस अध्यक्ष के प्रस्ताव को स्वीकार कर लेना चाहिए।
पार्टी नेताओं के एक वर्ग का मानना है कि कांग्रेस को अलग राज्य के गठन की प्रकिया की शुरुआत देनी चाहिए और इसका लाभ लेना चाहिए।
तेलंगाना क्षेत्र के एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने कहा, "अलग राज्य के गठन में किसी प्रकार की देरी का मतलब है टीआरएस का और मजबूत होना। इसका नतीजा चुनावों में कांग्रेस के भविष्य पर पड़ेगा।"
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि चंद्रशेखर ने सिर्फ अलग राज्य के गठन के मकसद से पार्टी का गठन किया था और यदि अलग राज्य का गठन हो जाता है तो ऐसे में उनकी पार्टी का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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