'गो, नो-गो' पर चर्चा के लिए तैयार हूं : रमेश

रमेश ने पत्रकारों से यहां कहा, "मैं 'गो, नो-गो' वर्गीकरण के मुद्दे पर खुले तौर चर्चा करने के लिए तैयार हूं।"

ज्ञात हो कि योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने बुधवार को पर्यावरण मंत्रालय द्वारा वर्गीकृत 'गो, नो-गो' क्षेत्रों की अवधारणा पर सवाल उठाया था।

अहलूवालिया के मुताबिक कोयला खदानों में खनन पर प्रतिबंध यदि जारी रहा तो देश के आधारभूत संरचना के विकास की योजनाओं को धक्का लग सकता है।

रमेश ने कहा कि 'गो, नो गो' की अवधारणा उनके पर्यावरण मंत्रालय का नहीं, बल्कि कोल इंडिया का है।

उन्होंने कहा, "कोल इंडिया के अध्यक्ष ने मुझे 'गो, नो गो' क्षेत्रों के बारे में सलाह दी थी।"

रमेश ने कहा कि पर्यावरण और कोयला मंत्रालय ने मिलकर योजना तैयार की। इस योजना के अनुसार जिन कोयला खदान क्षेत्रों में 65 प्रतिशत वन हैं उन्हें खनन के लिए 'गो' श्रेणी में रखा गया, जबकि 35 प्रतिशत से कम वन क्षेत्र वाले खदानों को 'नो गो' की श्रेणी में रखा गया।

मंत्रालय ने माना कि पारिस्थितिकी के लिए वन्यजीव और जल के संसाधन महत्वपूर्ण हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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