वाजपेयी को सुनने को तरस गए हैं लखनऊवासी

अरविंद मिश्रा

लखनऊ, 25 दिसंबर (आईएएनएस)। यूं तो पूर्व प्रधानमंत्री व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्षस्थ नेता अटल बिहारी वाजपेयी का हर कोई मुरीद है लेकिन लखनऊवासियों से बेहतर उनका मुरीद कोई कैसे हो सकता है। लखनऊ के लोगों ने उन्हें पांच बार अपना नेता चुनकर लोकसभा में भेजा।

वाजपेयी अस्वस्थ हैं और सक्रिय राजनीति से दूर भी। ऐसे में लखनऊवासियों का यह कहना कि 'उन्हें देखने को आंखें व सुनने को कान तरस गए हैं,' लाजिमी है। उनके 87वें जन्मदिन पर लोगों ने कुछ ऐसी ही भावना प्रकट की।

वाजपेयी 2007 के राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान प्रचार के सिलसिले में लखनऊ आए थे। उसके बाद खराब स्वास्थ्य के कारण पिछले तीन साल से ज्यादा समय से वह लखनऊ नहीं आ सके हैं। लखनऊ के लोगों का मानना है कि कोई और नेता वाजपेयी की कमी को पूरा नहीं कर सकता।

पुराने लखनऊ के चौक इलाके निवासी आभूषण व्यवसायी सूर्यकांत गुप्ता कहते हैं, "हम अटल जी को बहुत याद करते हैं। वह एक खास तरह का चेहरा हैं। आम आदमी हो या प्रबुद्ध वर्ग वह हर किसी को प्रभावित करते हैं। जात-पात से ऊपर उठकर हर समुदाय के लोग आज भी उन्हें ही अपना नेता मानते हैं।"

वह कहते हैं कि विपदा या मुसीबत के समय वह हमेशा लखनऊवासियों को ढांढस बंधाने आते हैं और हरसंभव मदद करते हैं। यह अलग बात है कि शारीरिक अस्वस्थता के चलते वह अब ऐसा कर पाने की स्थिति में नहीं हैं।

लखनऊ विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर सूर्य प्रसाद शर्मा कहते हैं कि वाजपेयी करिश्माई व्यक्तित्व के धनी हैं। उनके चेहरे में गजब का आकर्षण और उनकी वाणी में सम्मोहन है। उनके भाषण सुनने के लिए लाखों की भीड़ जुटती थी। आज भाजपा ही नहीं, दूसरे किसी राजनीतिक दल में भी उनके जैसा वक्ता कोई नहीं है। उन्हें देखने के लिए तो आंखें और सुनने को कान तरस गए हैं।

वह याद करते हैं, "मैं शहर में होने वाली वाजपेयी की रैलियों में जरूर जाकर उनका सम्बोधन सुनता था। अब भी तमन्ना यही होती है कि उनके ही भाषण सुनूं। हम जन्मदिन पर उनके स्वस्थ होने की कामना करते हैं।"

एक अन्य प्रोफेसर राजेंद्र भार्गव कहते हैं, "लखनऊवासियों ने वाजपेयी को जिताकर संसद भेजा और वह देश के प्रधानमंत्री बने। उन्होंने देश विदेश में लखनऊ का मान बढ़ाया। लखनऊ की जनता का जितना जुड़ाव वाजपेयी से रहा उतना किसी और सांसद से नहीं रहा। लखनऊवासियों को उनकी बहुत कमी खलती है।"

अलीगंज इलाके के निवासी तथा सामाजिक कार्यकर्ता शेखर त्रिपाठी कहते हैं कि जनता से सम्वाद करने का वाजपेयी का तरीका बेहद अद्भुत है। वह केवल किसी एक खास जाति या समुदाय के नेता नहीं हैं। हर वर्ग व हर तबका उन्हें आज भी अपना नेता मानता है।

त्रिपाठी के मुताबिक वाजपोयी ने लखनऊ के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। लखनऊवासियों का जो जुड़ाव वाजपेयी से रहा वह किसी और नेता से नहीं हो सकता, चाहे वह भाजपा का हो या किसी अन्य दल का।

ज्ञात हो कि वाजपेयी लखनऊ संसदीय सीट से लगातार वर्ष 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में सांसद चुने गए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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