भारत में पाठ्य पुस्तकें छपवाना सस्ता : बांग्लादेशी अधिकारी
बांग्लादेश के नेशनल कमीशन फॉर टेक्स्ट बुक्स (एनसीटीबी) के अध्यक्ष मुस्तफा कमाल उद्दीन ने कहा कि पिछले साल विदेश में एक पुस्तक छपवाने पर 23 टका (0.32 डॉलर) खर्च हुआ, जबकि देश में यह खर्च 44 टका हुआ। जबकि देश में छपी पुस्तक की गुणवत्ता विदेश में छपी पुस्तक जैसी नहीं थी।
समाचार पत्र डेली स्टार ने शनिवार को कमाल उद्दीन के हवाले से लिखा है कि लगभग 57 लाख प्राथमिक पाठ्य पुस्तक सीमा पर यातायात जाम के कारण भारत में फंसी हुई हैं। ये किताबें एक-दो दिन में बांग्लादेश पहुंच जाएंगी।
खबर में स्थानीय प्रकाशकों ने कोलकाता के प्रकाशकों पर आरोप लगाया है कि ठेका हासिल करने के लिए उन्होंने बांग्लादेश के अधिकारियों को रिश्वत दी है।
कमाल उद्दीन ने हालांकि कहा है कि विदेश में प्रकाशन करवाने से सरकार ने काफी खर्च की बचत की है।
उल्लेखनीय है कि अंतर्राष्ट्रीय निविदा के जरिए भारत में बांग्लादेश की पहली, दूसरी और तीसरी कक्षा की 2.98 करोड़ किताबें छप रही हैं। अधिकारियों ने कहा कि ये पुस्तकें देखने में सुंदर लगती हैं।
बांग्लादेश में एक जनवरी को राष्ट्रीय पाठ्यपुस्तक दिवस के पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना 30 दिसंबर को मुफ्त पुस्तक वितरण कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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