आगे की यात्रा दूसरी चुनौती है : बरगोहैन

सैयद जरीर हुसैन

गुवाहाटी, 25 दिसम्बर (आईएएनएस)। वर्षो तक भूमिगत रहना, फिर पकड़ा जाना और लम्बे समय तक सलाखों के पीछे रखा जाना तथा अंत में मुख्यधारा में वापसी, इस तरह देखा जाए तो मौजूदा समय में जमानत पर रिहा हुए असम के कम से कम पांच विद्रोही नेताओं का जीवन पूरा एक चक्कर काट चुका है।

युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के राजनीतिक विचारक भीमकांत बरगोहैन (71) ने आईएएनएस को बताया, "जमानत पर रिहा होने के बाद हमारी जो यात्रा शुरू हुई है, वह दूसरी चुनौती है।"

उल्फा कार्यकर्ताओं व नेताओं के बीच 'मामा' के नाम से चर्चित बरगोहैन को इसी महीने गुवाहाटी केंद्रीय कारागार से जमानत पर रिहा किया गया था।

बरगोहैन को भूटान की सेना ने दिसम्बर 2003 में 'ऑपरेशन आल क्लीयर' के दौरान गिरफ्तार किया था। भूटानी सेना ने वहां की धरती पर अड्डा जमाए उल्फा के 3,000 से अधिक कार्यकर्ताओं व असम के अन्य विद्रोहियों को खदेड़ने के लिए 'ऑपरेशन आल क्लीयर' चलाया गया था।

गिरफ्तारी के बाद बरगोहैन को भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया गया था। उसके बाद से वह असम की विभिन्न जेलों में कैद थे।

इस समय बरगोहैन पूर्वी असम के तिनसुकिया जिले में अहोम गांव में अपने रिश्तेदारों के साथ रह रहे हैं। वह अविवाहित हैं। अधिकांश समय वह जनसभाओं को सम्बोधित करने में व्यस्त रहते हैं। जब खाली रहते हैं तो अपने भतीजों और भतीजियों को अपने भूमिगत जीवन के बारे में बताते हैं।

बरगोहैन ने कहा, "मेरे पास खुद के लिए समय नहीं है, क्योंकि शुभचिंतक, परिवार के लोग और मित्र, जंगल में बीते मेरे जीवन और शांति वार्ता की सम्भावना के बारे में हमेशा पूछते रहते हैं।"

उल्फा के स्वयंभू कमांडर इन चीफ परेश बरुआ के अलावा उल्फा का पूरा शीर्ष खेमा जेल में था।

जेल में कैद रहे उल्फा नेताओं में संगठन के अध्यक्ष अरविंद राजखोवा, उपाध्यक्ष प्रदीप गोगोई, प्रचार प्रमुख मिथिंगा दायमरी, डिप्टी कमांडर इन चीफ राजू बरुआ, स्वयंभू विदेश सचिव सशा चौधरी, वित्त सचिव चित्रबन हजारिका, सांस्कृतिक सचिव प्रनति डेका और बरगोहैन शामिल हैं।

शांति वार्ता के लिए रास्ता साफ करने के लिए जब इन नेताओं की रिहाई की मांग ने जोर पकड़ा तो सरकार ने अदालत में जमानत याचिकाओं का विरोध न करने की रणनीति तैयार की।

इस तरह बारी-बारी से उल्फा के पांच शीर्ष नेता जेल से जमानत पर रिहा हो गए।

बरगोहैन ने कहा, "हम असम के लोगों से मिले प्यार और अथक समर्थन के लिए उनके आभारी हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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