जीसेट-5पी का प्रक्षेपण विफल, छोड़ने के फौरन बाद विस्फोट (लीड-2)
इस नाकामी से स्तब्ध भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आसमान में इसमें एकाएक हुए विस्फोट के बारे में कोई जानकारी नहीं दी लेकिन एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि गड़बड़ी प्रक्षेपण के दूसरे चरण के दौरान हुई।
एक अधिकारी ने बताया, "ऐसा लग रहा है कि रॉकेट का पहला चरण सामान्य रहा। गड़बड़ी दूसरे चरण में शुरू हुई जब रॉकेट को पर्याप्त बल नहीं मिला।"
एक अन्य अधिकारी का कहना है कि प्रक्षेपण पहले चरण पर ही नाकाम हो गया।
करीब 125 करोड़ रुपये की लागत और 2310 किलोग्राम वजन वाला जीसेट-5पी दूरसंचार क्षेत्र और मौसम विभाग की जरूरतें पूरी करने के उद्देश्य से छोड़ा गया था। यह इनसेट-2ई की जगह लेने वाला था, जिसे 1999 में प्रक्षेपित किया गया था।
इसरो ने शाम 4.04 बजे चेन्नई से करीब 80 किलोमीटर की दूरी पर श्रीहरिकोटा रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र से इसे प्रक्षेपित किया था।
यह रॉकेट तेज आवाज के साथ, अपने पिछले हिस्से से नारंगी रंग की मोटी लपटें उगलते हुए आसमान की तरफ बढ़ा और अचानक उसमें विस्फोट हो गया और यह टुकड़े-टुकड़े हो गया।
इसके नाकाम होते ही वैज्ञानिक समुदाय के बीच मायूसी छा गई।
यह प्रक्षेपण पहले 20 नवम्बर को होने वाला था लेकिन रूस में निर्मित क्रायोजनिक इंजन के एक वॉल्व में रिसाव होने की वजह से इसे टाल दिया गया।
बाद के परीक्षणों में वॉल्व का टिकाऊपन सुनिश्चित होने के बाद प्रक्षपेण के लिए 25 दिसम्बर का दिन तय किया गया।
रूस ने काफी अर्सा पहले भारत को सात क्रायोजनिक इंजन दिए थे और भारत उनमें से छह को आज तक इस्तेमाल कर रहा था।
अनुमान लगाया गया था कि जीसेट-5पी का जीवनकाल 13 साल से ज्यादा का होगा। इसके 36 ट्रांसपोंडर थे। इस प्रक्षेपण के कामयाब रहने से कक्षा में मौजूद इसरो की ट्रांसपोंडर क्षमता 200 से बढ़कर 235 हो जाती।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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