विकासशील देशों में उद्यम का पाठ पढ़ा रहा है भारत

नोएडा, 25 दिसम्बर (आईएएनएस)। कोस्टारिका की एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में काम करने वाली फातिमा अल्वाराडो हाल ही में भारत से 'ह्यमैन रिसोर्स डेवलपमेंट एंड आंट्रप्रनर्शिप एजुकेशन/ट्रेनिंग' के अंतर्राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की शिक्षा पूरी कर लौटी हैं।

फातिमा पहले से बहुराष्ट्रीय कम्पनी में कार्यरत थी और प्रबंधन से अवकाश लेकर इस पाठ्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के नोएडा स्थित संस्थान में आई थीं।

उनके साथ इस पाठ्यक्रम में कुल 25 छात्र थे। जिनमें से दो कोस्टारिका, तीन अफगानिस्तान, दो-दो नेपाल, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका और तंजानिया और कम्बोडिया, कांगो, केन्या, मलावी, मॉरीशस, म्यांमार, नाम्बिया, सूडान, विएतनाम, यमन, जाम्बिया और जिम्बाब्वे से एक-एक छात्र थे।

पाठ्यक्रम नेशनल इंस्टीट़्यूट फॉर आंट्रप्रर्शिप एंड स्मॉल बिजनेस डेवलपमेंट (निस्बड) संचालित करती है, जो छोटे-मझौले उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत एक शीर्ष संस्था है।

पिछले 27 साल में निस्बड ने विकासशील देशों के सैकड़ों लोगों को मानव संसाधन और उद्यम शिक्षा में प्रशिक्षित किया है। इसके पास अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण के उद्देश्य से सभी महत्वपूर्ण अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं।

निस्बड, ह्यूमैन रिसोर्स डेवलपमेंट एंड आंट्रप्रनर्शिप/ट्रेनिंग कार्यक्रम का संचालन विदेश मंत्रालय के भारतीय प्रौद्योगिकी एवं आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम के एक हिस्से के तौर पर करता है।

विदेशी मंत्री एस. एम. कृष्णा ने आईएएनएस से कहा कि पिछले लगभग साढ़े चार दशकों में एशिया, मध्य यूरोप, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका से हजारों लोगों ने हमारे कार्यक्रम में हिस्सा लिया है।

उन्होंने कहा कि आईटीईसी के कारण विकासशील देशों में भारत की एक अलग पहचान बनी है। अभी कुल 159 आईटीईसी साझीदार देशों से 'नागरिक व्यावसायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम' में हिस्सा लेने के लिए 5,000 से अधिक प्रशिक्षु हर साल भारत आते हैं।

कृष्णा ने कहा कि विकासशील देशों की मौजूदा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए संस्थान में भाषा विज्ञान, ग्रामीण विकास, उद्यम, आदि पर अन्य अनेक पाठ्यक्रम भी शामिल किए गए हैं।

विदेश सचिव निरुपमा राव ने कहा कि 2010-11 में 46 अलग-अलग संस्थानों में कुल 230 छोटी और लंबी अवधि पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

ह्यूमैन रिसोर्स डेवलपमेंट एंड आंट्रप्रनर्शिप एजुकेशन/ट्रेनिंग में नामीबिया के रक्षा मंत्रालय के मानव संसाधन निदेशालय के अधिकारी अमुपोलो सकारिया भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में उन्हें मानव संसाधन क्षेत्र की बहुत सारी तकनीकी और नई जानकारी मिली।

नेपाल में एक गैरसरकारी समाजसेवी संस्था के साथ करने वाले शाक्या ने आईएएनएस से कहा कि स्थानीय अखबारों में भारतीय दूतावास के एक विज्ञापन से मुझे इस पाठ्यक्रम के बारे में जानने को मिला।

उन्होंने कहा कि भारत ने उद्यमिता के क्षेत्र में बहुत तरक्की की है। इस पाठ्यक्रम में मुझे अपने पेशेवर कौशल को निखारने का मौका मिला। इसका उपयोग मैं अपने संस्थान और अपने देश में कर सकुंगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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