सेन की सजा पर छत्तीसगढ़ के वकीलों, राजनीतिज्ञों में चुप्पी

समाज, मीडिया और यहां तक कि वकीलों तक ने शुक्रवार को आए जिला एवं सत्र न्यायालय के फैसले पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है।

इस मुद्दे पर न तो राज्य की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से कोई बयान आया है और न विपक्षी कांग्रेस की ओर से ही।

राज्य के औद्योगिक कस्बों, कोरबा और रायगढ़ में सक्रिय एक प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता से जब प्रतिक्रिया मांगी गई तो उसने कहा, "चुप रहना बेहतर है, यह कोई राजनीतिक फैसला नहीं है, यह अदालती फैसला है, जिस पर टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं है।"

लेकिन उन्होंने तत्काल कहा, "कृपया मेरा नाम मत दीजिए, मैं प्रशासन की नाराजगी नहीं चाहता। यदि बिनायक सेन को फंसाया जा सकता है, तो मेरी क्या औकात?"

प्रमुख वकीलों ने भी सेन के खिलाफ न्यायमूर्ति बी.पी.वर्मा के फैसले पर टिप्पणी करने से दूर रहना ही बेहतर समझा है।

ज्ञात हो कि सेन को राजद्रोह और आपराधिक साजिश रचने के आरोपों में दोषी पाया गया है, जबकि प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य सान्याल और गुहा को आपराधिक साजिश रचने का दोषी पाया गया है। तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।

रायपुर के एक वरिष्ठ वकील ने कहा, "कृपया इस बारे में कोई प्रतिक्रिया मत मांगिए। यह एक बहुत ही संवेदनशील मामला है, जिससे कई राजनीतिज्ञों व पुलिस अधिकारियों की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। मैं संकट में नहीं पड़ना चाहता। लेकिन जब तमाम राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ता मीडिया को प्रतिक्रिया देने को उत्सुक हैं, तो फिर आप मेरी प्रतिक्रिया क्यों मांग रहे हैं?"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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