नायडू का अनशन जारी, घेराबंदी कर रहे तेदेपा नेता गिरफ्तार (लीड-1)
तेदेपा विधायकों द्वारा विधानसभा से सचिवालय की तरफ कूच करने के प्रयास से अति सुरक्षित इलाके में तनाव बढ़ गया। विधायकों सहित कुछ सांसद और पूर्व मंत्री सरकार विरोधी नारे लगाते हुए सचिवालय की तरफ बढ़े। प्रदर्शन कर रहे इन नेताओं को पुलिस ने रवींद्र भारती के पास रोक लिया।
इस दौरान तेदेपा नेताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच झड़प हुई। पुलिस के रोकने पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) सहित विपक्षी विधायक वहीं सड़क पर बैठ गए, जिसके चलते जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई। इसके बाद पुलिस उन्हें वहां से पुलिस स्टेशन ले गई।
ज्ञात हो कि अपनी मांगों पर सरकार की चुप्पी और नायडू को नसों के माध्यम से जबरन तरल पदार्थ देने के विरोध में विपक्षी दलों ने सचिवालय की घेराबंदी करने का आह्वान किया था।
तेदेपा नेताओं ने दावा किया कि गहन निगरानी कक्ष में नायडू का भूख हड़ताल जारी है।
इसके अलावा तेदेपा नेताओं को अन्य समूह सचिवालय के मुख्य द्वार के समीप पहुंच गया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। सचिवालय में घुसने का प्रयास कर रहे नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
तेदेपा विधायक पी. केशव ने कहा, "पुलिस की कार्रवाई अलोकतांत्रिक है। हमें मंत्रियों से मिलने और ज्ञापन सौंपने तक का मौका नहीं दिया गया।"
सचिवालय में प्रवेश करने में सफल हुए तेदेपा सांसद वेणुगोपाल रेड्डी को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया।
नायडू की ओर से जारी बयान में कहा गया कि किसानों के मुद्दे को लेकर आंदोलन जारी रहेगा और इसे राष्ट्रीय आंदोलन का स्वरूप दिया जाएगा।
निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एनआईएमएस) के चिकित्सकों ने गुरुवार रात नायडू के गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें नसों के जरिए जबरन तरल पदार्थ चढ़ाया। एनआईएमएस के निदेशक पी.वी. रमेश ने बताया कि उनके पास इसके सिवा कोई विकल्प नहीं बचा था।
पुलिस ने पहले ही मजिस्ट्रेट के एक आदेश को एनआईएमएस प्रशासन को मुहैया करा दिया था, जिसमें नायडू के स्वास्थ्य की देखभाल करने का निर्देश दिया गया था।
नायडू के कमरे में मौजूद तेदेपा के कुछ कार्यकर्ताओं को पुलिस ने जबरन वहां से हटाया। कार्यकर्ताओं के अलावा पुलिस ने नायडू की पत्नी भुवनेश्वरी और उनके अन्य रिश्तेदारों को भी वहां से हटने के लिए कहा।
नायडू के स्वास्थ्य की देखभाल कर रहे चिकित्सकों की 10 सदस्यीय टीम में से पांच चिकित्सकों ने तरल पदार्थ दिए जाने की हामी भरी, जिसमें उनके निजी चिकित्सक बी. सोमाराजू भी थे। चिकित्सकों को इस बात का डर सता रहा था कि वह कोमा में जा सकते हैं और उसके बाद उनके अंग नाकाम हो सकते हैं।
उधर, मुख्यमंत्री एन. किरण रेड्डी ने गुरुवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में नायडू की मांगों को मानने से इंकार कर दिया था लेकिन किसानों को वित्तीय सहायता दिलाने की मांग को लेकर एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली भेजने पर उन्होंने अपनी सहमति व्यक्त की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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