नायडू का अनशन आठवें दिन भी जारी
निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइसेज (एनआईएमएस) के चिकित्सकों ने गुरुवार रात नायडू के गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें नसों के जरिए जबरन तरल पदार्थ चढ़ाया। एनआईएमएस के निदेशक पी.वी. रमेश ने बताया कि उनके पास इसके सिवा कोई विकल्प नहीं बचा था।
पुलिस ने पहले ही मजिस्ट्रेट के एक आदेश को एनआईएमएस प्रशासन को मुहैया करा दिया था, जिसमें नायडू के स्वास्थ्य की देखभाल करने का निर्देश दिया गया था।
नायडू के कमरे में मौजूद तेदेपा के कुछ कार्यकर्ताओं को पुलिस ने जबरन वहां से हटाया। कार्यकर्ताओं के अलावा पुलिस ने नायडू की पत्नी भुवनेश्वरी और उनके अन्य रिश्तेदारों को भी वहां से हटने के लिए कहा।
नायडू के स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें गहन निगरानी कक्ष में दाखिल कराया गया और फिर नसों के जरिए तरल पदार्थ चढ़ाया गया। गिरफ्तारी के बाद से ही नायडू ने किसी तरह का तरल पदार्थ लेने या इलाज कराने से इंकार कर दिया था।
नायडू के स्वास्थ्य की देखभाल कर रहे चिकित्सकों की 10 सदस्यीय टीम में से पांच चिकित्सकों ने तरल पदार्थ दिए जाने की हामी भरी, जिसमें उनके निजी चिकित्सक बी. सोमाराजू भी थे। चिकित्सकों को इस बात का डर सता रहा था कि वह कोमा में जा सकते हैं और उसके बाद उनके अंग नाकाम हो सकते हैं।
पुलिस और अस्पताल प्रशासन की इस कार्रवाई पर तेदेपा ने ऐतराज जताया। पार्टी ने दावा किया कि नायडू अभी भी भूख हड़ताल पर हैं।
तेदेपा के एक वरिष्ठ नेता एन. जनार्दन रेड्डी ने कहा, "पुलिस बल का इस्तेमाल कर यह सरकार कब तक चलेगी?"
किसानों को मुआवजा देने की मांग को लेकर तेदेपा के अलावा दोनों वाम दलों ने भी शुक्रवार को सचिवालय की तरफ मार्च करने का ऐलान किया है।
उधर, मुख्यमंत्री एन. किरण रेड्डी ने गुरुवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में नायडू की मांगों को मानने से इंकार कर दिया था लेकिन किसानों को वित्तीय सहायता दिलाने की मांग को लेकर एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली भेजने को लेकर उन्होंने अपनी सहमति व्यक्त की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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