अमेरिकी जासूसों की हत्या कर रहे हैं आतंकी
क्षेत्र के कबायलियों ने कहा है कि लगभग हर रोज सड़कों के किनारे और मैदानों में शव पाए जा रहे हैं और उनके कपड़ों पर चेतावनी चस्पा की हुई होती है, जिसमें लिखा होता है, "सभी अमेरिकी जासूसों का यही हाल होगा।"
अमेरिकी समाचार पत्र 'वाशिंगटन पोस्ट' ने शुक्रवार को कहा है, "अराजक सीमावर्ती इलाके में जासूसी लम्बे समय से अपराध माना जाता रहा है, लेकिन वहां के निवासियों का कहना है कि हत्याओं की मौजूदा गति अभूतपूर्व है।"
अमेरिकी जासूसों की हत्या और उत्तरी वजीरिस्तान पर अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के ड्रोन हमले समानांतर रूप से जारी हैं। उत्तरी वजीरिस्तान आतंकियों का एक गढ़ है, जहां अलकायदा और हक्कानी नेटवर्क के आतंकी पनाह लेते हैं।
'वाशिंगटन पोस्ट' ने कहा है कि सीआईए के ड्रोन इस वर्ष पाकिस्तान के कबायली इलाकों में 112 मिसाइलें दाग चुके हैं। इनमें से 88 प्रतिशत मिसाइलें उत्तरी वजीरिस्तान में गिरी हैं।
लेकिन कबायलियों का अब कहना है कि अमेरिकी अभियान का उत्तरी वजीरिस्तान के लोगों पर दूरगामी असर है और इससे हिंसा के दुष्चक्र को बढ़ावा मिला है, इसकी कल्पना कर पाना कठिन है और इसे रोक पाना असम्भव है।
कई पाकिस्तानी अधिकारियों, कबायलियों और आतंकियों ने कहा है कि ड्रोन हमलों के कारण इलाके के लोग घरों में दुबके रहने को मजबूर हैं और जासूसी के आरोपों के डर से मित्रों को पनाह देने से इंकार कर देते हैं।
उत्तर पश्चिम क्षेत्र में सभी पाकिस्तानी सैनिकों का नेतृत्व कर रहे, लेफ्टिनेंट जनरल आसिफ यासीन मलिक ने कहा, "आतंकी किसी की भी हत्या कर, केवल आतंक फैला रहे हैं।"
पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने कहा है कि ड्रोन हमले आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाने में काफी प्रभावी सिद्ध हुए हैं।
खुफिया अधिकारी ने कहा कि उत्तर वजीरिस्तान में 2004 से लेकर अब तक इंटर-सर्विसिस इंटेलिजेंस (आईएसआई)के 70 जासूस मारे जा चुके हैं। आईएसआई, ड्रोन हमलों के लिए सीआईए को खुफिया जानकारी मुहैया कराती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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