सेन सहित 3 को उम्रकैद, परिजन खिन्न, कार्यकर्ता नाराज (लीड-2)
रायपुर/नई दिल्ली, 24 दिसम्बर (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ की एक अदालत ने मानवाधिकार कार्यकर्ता बिनायक सेन को नक्सलियों से कथित सम्बंधों के कारण शुक्रवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले से निराश सेन के परिवार ने इस दिन को भारतीय लोकतंत्र का दुखद दिन करार दिया है। जबकि साथी कार्यकर्ताओं ने इस फैसले के खिलाफ अपील करने का संकल्प लिया है।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश बी.पी.वर्मा ने सेन के अलावा दो अन्य (नारायण सान्याल, पीयूष गुहा) को भी दोषी ठहराया और उन्हें भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सान्याल और गुहा पर नक्सली होने का आरोप है।
न्यायाधीश वर्मा ने सेन (59)को भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए और 120 बी के तहत राजद्रोह व साजिश रचने का दोषी पाया।
सेन को छत्तीसगढ़ विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम व छत्तीसगढ़ गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत भी दोषी पाया गया है। दोषी करार देने के बाद सेन को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया।
उम्र के 80वें दशक में चल रहे नक्सली विचारक सान्याल और कोलकाता के व्यापारी पीयूष (30) पहले से ही न्यायिक हिरासत में हैं और दोनों अदालत में उपस्थित थे।
सेन को हालांकि राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने के मामले में बरी कर दिया गया है।
सेन की पत्नी इलिना सेन ने अदालत परिसर में कहा, "मैं अदालत के फैसले से पूरी तरह असहमत हूं। उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। हम इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय जाएंगे।"
इलिना ने कहा, "जिस व्यक्ति ने 30 वर्षो तक देश के गरीबों के लिए काम किया हो, यदि वह व्यक्ति राजद्रोह और साजिश रचने का दोषी पाया जाता हो, और वहीं पर अपराधी और घोटालेबाज स्वच्छंद घूम रहे हों, तो मैं समझती हूं यह एक शर्मनाक स्थिति है।"
इलिना ने कहा, "मुझे दुख है। मैं इसलिए दुखी हूं, क्योंकि मेरी बेटियों, मेरे पति और मुझे एक और लम्बी लड़ाई लड़नी होगी। मुझे नहीं पता कि यह लड़ाई कितनी लम्बी होगी। मुझे भारतीय लोकतंत्र की स्थिति को लेकर और भी ज्यादा दुख है।"
सेन के भाई दीपांकर सेन ने रूंधे गले से अदालत परिसर में मीडियाकर्मियों से कहा, "मैं बेजुबान हो गया हूं, कृपया मुझे अकेला छोड़ दीजिए।"
पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) की राष्ट्रीय महासचिव कविता श्रीवास्तव ने नाराजगी के साथ कहा, "यह मामला छत्तीसगढ़ सरकार और पुलिस ने गढ़ा है। हम इसके खिलाफ अपील करेंगे।" सेन पीयूसीएल के उपाध्यक्ष हैं।
पीयूसीएल के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र के.सेल ने कहा, "यह अन्याय है, पूरी तरह निराशाजनक। सेन के खिलाफ कोई सबूत नहीं था। हम इसके खिलाफ अपील करेंगे।"
पीयूसीएल के सचिव महिपाल सिंह ने नई दिल्ली में आईएएनएस से कहा, "मैं हैरान हूं। हमें इसकी बिल्कुल उम्मीद नहीं थी, क्योंकि उनके खिलाफ सबूत का एक कतरा भी नहीं था। हमारे लोकतंत्र के लिए यह एक बुरा दिन है।"
सिंह ने कहा, "हमें अभी-अभी फैसले की प्रति मिली है, इसलिए आगे की कानूनी प्रक्रिया तय करने में हमें थोड़ा समय लगेगा।"
ज्ञात हो कि सेन को नक्सली विचारक, सान्याल के साथ कथित सम्बंधों के लिए 2007 में बिलासपुर से गिरफ्तार किया गया था, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने मई 2009 में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*


Click it and Unblock the Notifications