शिमला में 111 साल से क्रिसमस पर बजता है 'पाइप ऑर्गन'
इसे बजाने वाले बेजल डीन बताते हैं कि चर्च में 'पाइप ऑर्गन' 23 सितंबर, 1899 को स्थापित किया गया था। संभवत: यह दुनिया का सबसे पुराना ऐसा वाद्ययंत्र है, जो अब तक काम कर रहा है।
क्राइस्ट चर्च ऐतिहासिक रिज रोड पर स्थित है। चर्च के पुराने दस्तावेजों के मुताबिक 'पाइप ऑर्गन' की आवाज पहली बार 28 सितंबर, 1899 को इसकी स्थापना के पांच दिन बाद सुनी गई थी। तब इसे लगाने पर कुल 23 हजार रुपए खर्च हुए थे। इसके बाद 1932 में इसकी मरम्मत की गई थी। बाद में समय-समय पर इसकी नियमित रूप से मरम्मत होती रही।
इन दिनों डीन की 15 वर्षीया बेटी एंजेलिका इस वाद्ययंत्र को बजाने की कोशिश कर रही है, ताकि 25 दिसंबर को क्रिसमस पर वह इस काम को बेहतर ढंग से अंजाम दे सके।
डीन को इसे बजाने में महारत हासिल है। वह इसका ख्याल भी रखते हैं। वह कहते हैं कि अब बाजार में इस उपकरण के विभिन्न हिस्से उपलब्ध नहीं हैं। स्थानीय तकनीशियन से ही जरूरत पड़ने पर इसकी मरम्मत कराई जाती है।
'पाइप ऑर्गन' से हारमोनियम, वायलिन सहित कई वाद्ययंत्रों की आवाज निकलती है। इसमें करीब एक हजार पाइप हैं, जिनमें हवा भरकर इसे बजाया जाता है। हवा का नियंत्रण एक बड़े कीबोर्ड से होता है।
क्रिसमस पर अंग्रेजी, हिन्दी और पंजाबी में प्रार्थना की जाएगी, जिसमें 'पाइप ऑर्गन' से संगीत दिया जाएगा।
अंग्रेजों के जाने के बाद एम. रॉबर्ट्स (1948-1967), एम. थोर्प (1967-1974), हेनरी दास (1974-1978) और जेम्स डेविड (1972-1982) ने इस वाद्ययंत्र को बजाने की जिम्मेदारी संभाली।
अंग्रेजों के जाने के 60 वर्ष बाद भी हिमालय क्षेत्र का यह शहर हजारों की तादाद में घरेलू और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। पिछले साल हिमाचल प्रदेश में 11,437,155 पर्यटक आए थे, जिनमें 400,583 विदेशी पर्यटक थे। शिमला और धर्मशाला के बाद कुल्लू तथा मनाली मुख्य पर्यटन केंद्र हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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