जगन का अनशन खत्म, नायडू का जारी (लीड-1)
उधर, मुख्यमंत्री एन. किरण कुमार ने राहत पैकेज को लेकर विचार-विमर्श के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का वादा किया है।
नायडू की लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए निजाम चिकित्सा विज्ञान संस्थान (एनआईएमएस) के चिकित्सकों ने उनके परिजनों को फिर सलाह दी है कि वे अनशन जल्द तोड़ने के लिए उन्हें मनाएं।
नायडू भारी बारिश के कारण किसानों को हुई क्षति की भरपाई के लिए राहत पैकेज की मांग को लकर अनशन कर रहे हैं। वह गहन चिकित्सा इकाई में जाने से इंकार कर रहे हैं। वह इलाज कराने या नसों के जरिए तरल पदार्थ लेने से भी मना कर रहे हैं।
तेदेपा नेताओं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने मुख्यमंत्री द्वारा गुरुवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की समस्या के समाधान में सरकार की रुचि नहीं है।
राज्य सचिवालय में होने वाली बैठक के बहिष्कार के बाद तेदेपा के वरिष्ठ नेता वाई. रामकृष्णुडू ने कहा, "अनशन पर बैठे हमारे नेता की मांग पर जवाब देने के बजाय मुख्यमंत्री इतिहास की बात कर रहे हैं और अनावश्यक मुद्दे उठा रहे हैं। हमने उनसे कह दिया है कि वह हमें तभी बातचीत के लिए बुलाएं जब हमारी मांग पर विचार करने के लिए तैयार हों।"
तेदेपा नेताओं ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के हाव-भाव से यह नहीं लगा कि उन्हें नायडू के स्वास्थ्य या किसानों की समस्याओं की कोई चिंता है।
तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) सहित अन्य विपक्षी दल प्रजा राज्यम (पीआरपी) तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वह किसानों की गंभीर समस्याओं के हल के लिए हर संभव उपाय करें, ताकि किसानों की आत्महत्यों की घटनाएं रुक सकें।
उन्होंने यह भी मांग की कि मुख्यमंत्री सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलें और आंध्र प्रदेश के किसानों के लिए विशेष पैकेज की मांग करें।
उधर, नायडू समर्थक प्रदर्शनकारियों ने राजमार्गो पर बसों और अन्य वाहनों का आवागमन बाधित कर दिया। पुलिस ने बसों को क्षतिग्रस्त करने और यातायात बाधित करने पर बड़ी संख्या में तेदेपा कार्यकर्ताओंको गिरफ्तार किया।
नायडू के गिरते स्वास्थ्य को लेकर गुस्साए तेदेपा विधायकों के एक समूह ने बुधवार रात को मुख्यमंत्री एन. किरण रेड्डी के काफिले को उस समय रोकने का प्रयास किया था, जब वह एक समारोह में शामिल होकर वापस लौट रहे थे।
कार्यक्रम स्थल के भीतर तेदेपा विधायकों को प्रवेश करने से रोकने के लिए मुख्यद्वार को सुरक्षाकर्मियों ने बंद कर दिया था। मुख्यमंत्री को दूसरे द्वार से समारोह स्थल पर ले जाया गया था।
तेदेपा विधायकों ने हालांकि बाद में मुख्यमंत्री के कार्यालय पहुंचकर उनसे मुलाकात की। विधायकों से मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने नायडू की 20 मांगों पर विचार करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का वादा किया।
अनशन पर बैठे नायडू की देखरेख कर रहे चिकित्सकों ने आगाह किया है कि यदि उन्होंने अपना अनशन समाप्त नहीं किया तो उनकी हालत और खराब हो सकती है।
वहीं राज्य सरकार ने दावा किया है कि किसानों के लिए पहले ही उचित मुआवजे की घोषणा की जा चुकी है।
उल्लेखनीय है कि नायडू को सोमवार को गिरफ्तार कर अस्पताल ले जाया गया था। नायडू भारी बारिश के कारण किसानों को हुई क्षति को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और उचित मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।
दूसरी ओर, कांग्रेस छोड़ने के बाद कृष्णा नदी के तट पर राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन करने वाले जगनमोहन ने कहा कि कांग्रेस सरकार का राज्य से जाने का समय आ चुका है।
पूर्व सांसद की 48 घंटे का भूख हड़ताल गुरुवार को पूरी हो गई। उन्होंने एक किसान के हाथ से फल का रस पीकर अपनी भूख हड़ताल समाप्त की। जगन ने सरकार से किसानों के लिए एक बेहतर राहत पैकेज की मांग की।
जगन की इस भूख हड़ताल को सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के दो दर्जन से अधिक विधायकों, दो सांसदों, कई पूर्व मंत्रियों और नेताओं ने अपना समर्थन दिया।
इस मौके पर जगन ने मौजूदा राज्य सरकार को 'किसान विरोधी' बताया। स्वर्गीय मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के पुत्र जगन ने कहा कि राज्य में कांग्रेस की सरकार विधानसभा चुनाव से पहले ही गिर सकती है।
राज्य के राजनीतिक हलकों में भी ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि जगन के वफादार सरकार से अपना समर्थन वापस लेकर मध्यावधि चुनाव का कारण बन सकते हैं।
जगन ने कहा, "अभी चुनाव होने में तीन वर्ष से अधिक का समय है, लेकिन सरकार उसके पहले अपना बहुमत खो सकती है।"
कृष्णा नदी के तट पर 100,000 से अधिक किसानों और समर्थकों को सम्बोधित करते हुए कडप्पा के इस पूर्व सांसद ने सरकार पर किसान समर्थक नीतियों को त्यागने का आरोप लगाया।
उन्होंने अपनी 'लक्ष दीक्षा' (एक लाख लोगों द्वारा उपवास) को शुरुआत बताया। पूर्व सांसद ने कहा कि आने वाले समय में इस तरह के और प्रदर्शन होंगे।
नायडू की भूख हड़ताल पर जगन ने कहा कि नायडू और कांग्रेस सरकार के बीच सांठगांठ है जिसकी वजह से किसानों को उनका वाजिब हक नहीं मिला है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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