जेपीसी पर थम नहीं रहा है विवाद (लीड-1)
विपक्ष के समक्ष बुधवार को यह प्रस्ताव रखने वाले मुखर्जी ने गुरुवार को कहा कि संसद के पूरे शीतकालीन सत्र को नहीं चलने देने के लिए विपक्ष को राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए।
मुखर्जी ने गुरुवार को संवाददाताओं से कहा, "उन्होंने संसद जैसी लोकतांत्रिक संस्था को तबाह कर दिया है। उन्हें राष्ट्र से माफी मांगनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि यह विपक्ष ही था जिसने बीते सत्र में संसद में कामकाज नहीं होने दिया।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) द्वारा प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग किए जाने के बाद मुखर्जी ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराने की आवश्यकता पर बहस के लिए बुधवार को विपक्ष के समक्ष संसद का विशेष सत्र बुलाने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन विपक्ष मुखर्जी के इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए घोटाले की जांच जेपीसी से कराने की मांग पर अड़ा हुआ है।
भाजपा ने स्पष्ट किया किया है कि वह बहस नहीं, बल्कि इसकी जांच जेपीसी से कराना चाहती है। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने यहां संवाददाताओं से कहा, "हम जेपीसी पर बहस नहीं, बल्कि जेपीसी चाहते हैं।"
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने प्रणब के प्रस्ताव पर आश्चर्य जताया जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने जेपीसी मांग को उचित ठहराते हुए प्रणब के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।
माकपा नेता नीलोत्पल बसु ने कहा कि उनकी पार्टी ने मुखर्जी के प्रस्ताव पर अभी विचार नहीं किया है। बसु ने आईएएनएस से कहा, "यह प्रस्ताव अद्भुत तरीके से सामने आया है।"
भाकपा नेता डी. राजा ने कहा कि जेपीसी की मांग उचित है। सरकार यह स्पष्ट करे कि वह क्यों इससे पीछे हट रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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