औद्योगीकरण से पहले ग्रामीण निकायों को दुरुस्त किया जाएगा : मुंडा
रांची, 23 दिसम्बर (आईएएनएस)। झारखण्ड के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा है कि विकास की प्रक्रिया के तहत सबसे पहले राज्य के ग्रामीण निकायों को दुरुस्त करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। मुंडा ने राज्य में औद्योगीकरण को लेकर निजी कम्पनियों के साथ कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
मुंडा ने यह भी वादा किया कि राज्य में भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री के तौर पर 100 दिन पूरा करने वाले मुंडा ने आईएएनएस को दिए साक्षात्कार में कहा, "ग्रामीण निकायों को दुरुस्त करने के बाद राज्य सरकार औद्योगीकरण पर अपना ध्यान केंद्रित करेगी।"
उन्होंने कहा, "पंचायत चुनावों के बाद हमारा ध्यान स्थानीय निकायों को और बेहतर बनाने की तरफ है। एक बार जब इन निकायों का समुचित तरीके से विकास हो जाएगा तो उसके बाद सरकार अपना ध्यान राज्य में औद्योगीकरण पर लगाएगी।"
वर्ष 2000 में बिहार से अलग होने के बाद पहली बार झारखण्ड में पंचायत चुनाव कराया गया है।
वर्ष 2003 से 2006 के बीच मुंडा ने पहले कार्यकाल के दौरान 70 से अधिक निजी कम्पनियों के साथ इस्पात, ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में तीन लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के समझौता किए थे।
आर्सेलर मित्तल, जिंदल स्टील और टाटा स्टील जैसी दिग्गज कम्पनियां जमीन अधिग्रहण और खनन लाइसेंस नहीं प्राप्त किए जाने के कारण अभी तक अपना कारोबार नहीं शुरू कर पाई हैं।
जमीन अधिग्रहण के बाद लोगों के विस्थापन की समस्या और उनकी भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मुंडा राज्य में औद्योगीकरण को लेकर बड़ी सावधानी बरत रहे हैं।
मुंडा कहते हैं, "हम राज्य के विकास के साथ लोगों को जोड़ना चाहते हैं और किसी भी तरह का औद्योगीकरण केवल लोगों के सहयोग से ही पूरा हो सकेगा।"
मुख्यमंत्री मुंडा ने कहा, "हम एक-एक कर समस्याओं का निदान करेंगे। सरकार भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। हम हर विभाग की समीक्षा कर प्राथमिकता तय कर रहे हैं। आने वाले समय में सरकार हर क्षेत्र और हर विभाग पर अपनी नजर रखेगी।"
मुंडा ने साथ ही यह भी कहा कि नई सरकार के 100 दिन के कार्यकाल के भीतर ही 100 से अधिक सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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