गलत पहचान होने के कारण चीनी किशोर को 200 दिनों का कारावास
किशोर को यह सजा डाका डालने के अपराध में दो साल पहले मिली थी।
अधिकारियों को उनकी गलतियों का अहसास तब हुआ, जब किशोर उस अपराधी से जेल में मिला, जिसके अपराध की सजा वह भुगत रहा था।
हर्जाने के तौर पर किशोर के परिवार को 23,000 युआन (3,445 डॉलर) दिए गए हैं।
किशोर के परिवार का कहना है कि 212 दिनों को जो कठिन मानसिक यंत्रणा किशोर ने झेली है उसके खिलाफ वे उच्चतर अदालत में जाएंगे।
घटना मार्च 2008 की है। किशोर के एक पूर्व सहपाठी मा किंग्लिन को डाका डालने के एक अपराध में गिरफ्तार किया गया था। उसने अधिकारियों के सामने अपना जुर्म कबूल कर लिया और कहा कि उसने किशोर के एक हमनाम को चुराए गए कुछ गहने बेचने के लिए दिए थे।
नाम एक होने और मा का सहपाठी होने के कारण अधिकारियों ने किशोर को पकड़ लिया। किशोर को तब 15 साल उम्र होने और दूसरे का चुराया सामान बेचना अपराध नहीं होने के कारण छोड़ दिया गया था।
मा ने अधिकारियों को उसके अन्य जुर्म की भी बात कही, लेकिन यह बताना भूल गया कि वह किशोर की नहीं बल्कि एक चौकीदार की बात कर रहा है।
अधिकारियों ने किशोर को सितंबर 2008 में दोबारा गिरफ्तार कर कारावास में डाल दिया। किशोर ने कई बार अधिकारियों को बताने की कोशिश की उसने कोई जुर्म नहीं किया है, लेकिन अधिकारियों ने उसकी एक न सुनी। उसकी जम कर धुनाई की गई।
पुलिस अधिकारी ने उस पर खुद का लिखा बयान पढ़ने का दबाव दिया और उसे किशोर के जुर्म का स्वीकारनामा मान लिया गया।
बाद में किशोर को उस कारावास से निकाल कर एक दूसरे कारावास में डाल दिया गया, जहां मा पहले से बंद था। उसकी मुलाकात वहां मा से हुई। उसके बाद मामले की सारी सच्चाई अधिकारियों के सामने आई। तब तक किशोर 212 दिनों की सजा भुगत चुका था।
वास्तविक अपराधी को बाद में पकड़कर कारावास में डाल दिया गया और गलती करने वाले दो पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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