मोरारजी ने कहा था, पाक के परमाणु बम को नष्ट कर देंगे
नई दिल्ली/ वाशिंगटन, 22 दिसम्बर (आईएएनएस)। अमेरिका द्वारा वर्ष 1970 में भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु हथियारों की होड़ को हतोत्साहित करने के प्रयास पर उसे दोनों देशों की कड़ी आपत्ति का सामना करना पड़ा था। उस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने अमेरिकियों से कहा था कि वह किसी भी पाकिस्तानी परमाणु प्रयासों को 'नष्ट' कर देंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति जिम्मी कार्टर के जमाने के अमेरिकी सरकार के दस्तावेज हाल ही मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा लेखागार द्वारा प्रकाशित किए गए हैं। इसमें संकट के उस दौर पर रोशनी डाली गई है, जब वाशिंगटन ने पाया था कि पाकिस्तान ने परमाणु हथियारों की क्षमता के मुख्य तत्वों पर कब्जा जमा लिया है।
वर्ष 1977 में सत्ता में आने पर कार्टर प्रशासन ने पाकिस्तानी परमाणु कार्यक्रम को हतोत्साहित करने का प्रयास किया था।
लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और अमेरिकी विदेश विभाग ने 1978 में खुलासा किया था कि इस्लामाबाद अपकेंद्रित संयंत्र बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है और इसके 'दोहरे प्रयोग' के लिए वह पाकिस्तानी परमाणु वैज्ञानिक ए.क्यू. खान द्वारा हथियाई गई प्रौद्योगिकी तथा उनके नेटवर्क की मदद ले रहा है।
जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय की एक रिपोर्ट के अनुसार सूची से हटाए गए दस्तावेज से पता चलता है कि कार्टर ने पाकिस्तानियों के बढ़ते कदम को रोकने के लिए कूटनीतिक दबाव और प्रलोभन का घालमेल पेश किया था और भारत के प्रति समझ बढ़ाने के लिए उन्हें प्रेरित किया था।
वर्ष 1979 में वाशिंगटन जब भारत और पाकिस्तान के परमाण्विक गतिविधियों में 'पारस्परिक अवरोध' से जुड़े क्षेत्रीय समाधान का खाका तैयार करने में विफल रहा, तब मोरारजी देसाई ने घोषणा की कि "यदि वह यह खुलासा कर दे कि पाकिस्तान परमाणु परीक्षण करने की तैयारी में है या फिर ऐसा कर चुका है, तो वह उसे नष्ट करने की दिशा में कदम उठाएंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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