दिल्ली में एम्बुलेंस के लिए वीआईपी प्रतिबंध व जाम सबसे बड़ी बाधा
नई दिल्ली, 22 दिसम्बर (आईएएनएस)। दिल्ली में एम्बुलेंस सेवा प्रदान करने वाली संस्थाओं का मानना है कि आपात स्थितियों में एम्बुलेंस वाहनों के साथ किस तरीके से पेश आना चाहिए, इसके प्रति राजधानीवासी जागरूक नहीं हैं। इसके अलावा यातायात जाम और अति विशिष्ट लोगों की आवाजाही के चलते एम्बुलेंस वाहन निर्धारित स्थानों पर समय पर पहुंचने में असफल होते हैं।
त्वरित एम्बुलेंस सेवा प्रदाताओं का कहना है कि शीर्ष नेताओं और गणमान्य व्यक्तियों को सुविधा देने के लिए यातायात पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों से एम्बुलेंस वाहनों को मुक्त रखना चाहिए।
'दिल्ली एम्बुलेंस सर्विस' की निदेशक अश्विनी कपूर ने कहा, "अति विशिष्ट व्यक्तियों की बढ़ती गतिविधियों के चलते अक्सर यातायात पर प्रतिबंध लगा होता है। इससे हम लोगों को समय से अस्पताल पहुंचने में दिक्कत होती है।"
उन्होंने कहा कि एम्बुलेंस के लिए रास्ता देने में लोग परिपक्वता का परिचय नहीं देते। इससे एम्बुलेंस वाहनों को भीड़भाड़ वाली गलियों और अन्य वैकल्पिक रास्तों का चुनाव करना पड़ता है, इसमें काफी परेशानी होती है।
ज्ञात हो कि राजधानी में करीब 2,000 एम्बुलेंस वाहन अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से कई निजी अस्पतालों से जुड़े हैं।
दिल्ली सरकार 'सेंट्रल एक्सीडेंटल ट्रामा सर्विसेज' (कैटस) नाम से 51 एम्बुलेंस चलाती है। इसकी सेवा के लिए यहां रोजाना 150 लोग फोन करते हैं, जबकि निजी अस्पतालों में यह संख्या 10 से 20 के करीब होती है।
कैटस के एक कर्मचारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर आईएएनएस को बताया, "दिल्ली में एम्बुलेंस वाहनों को चलाना मुश्किल होता जा रहा है। एक दिन में पांच मामलों में से कम से कम एक मामला यातायात प्रतिबंधों और रुकावटों की वजह से गंभीर हो जाता है।"
कर्मचारी ने बताया कि कैटस को हाल ही में मिले एम्बुलेंस आकार में थोड़े बड़े हैं, जिसकी वजह से संकीर्ण स्थानों पर पहुंचने में कठिनाई होती है।
उल्लेखनीय है कि हृदयाघात से पीड़ित शाहदरा निवासी अनिल जैन (46) की मौत अस्पताल ले जाते समय रास्ते में हो गई। उन्हें अस्पताल ले जा रहा एम्बुलेंस गत रविवार रात राजघाट के समीप प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के काफिले के लिए लगाए गए यातायात प्रतिबंधों में फंस गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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