विश्व बैंक ने राजमार्ग की स्थिति सुधारने के लिए कर्ज दिया
विश्व बैंक की इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट इकाई से मिले इस ऋण की रियायती अवधि पांच साल और परिपक्व ता अवधि 18.5 साल है।
वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के संयुक्त सचिव वेणु राजामोनी ने समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद कहा कि यह ऋण एनएचएआई को अंतर्राष्ट्रीय तरीकों को अपनाकर कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद करेगा।
सड़क विकास के सामने आने वाली बाधाओं को हटाने की केंद्रीय सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार ने एनएचएआई को जिम्मेदारी सौंपी है।
वित्त मंत्रालय के बुधवार के बयान के मुताबिक देश में कुल सड़क यातायात का 40 फीसदी राष्ट्रीय राजमार्गो पर होता है और पिछले कुछ सालों से हर साल 10 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही वाहनों की संख्या को देखते हुए कहा जा सकता है कि यह आंकड़ा और ऊपर जा सकता है।
भारत के कुल राष्ट्रीय राजमार्ग का 30 फीसदी हिस्सा एकल लेन मार्ग है और सिर्फ 17 फीसदी ही चार, पांच या छह लेन के मार्ग हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग का शेष हिस्सा दो लेन का है।
केंद्र सरकार ने 2000 में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना शुरू की थी। इस परियोजना पर एनएसएआई काम कर रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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