राजग की रैली में मनमोहन रहे निशाने पर (लीड-3)

रैली को सम्बोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि वह प्रधानमंत्री से अंतिम बार अपील कर रहे हैं कि वह स्पेक्ट्रम घोटाले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने की विपक्ष की मांग मान लें।

प्रधानमंत्री द्वारा जेपीसी के गठन की मांग को खारिज किए जाने के लिए आडवाणी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि उनके (सोनिया) कारण ही मनमोहन सिंह जेपीसी के खिलाफ है। उन्होंने कहा, "मैं अंतिम बार यह अपील कर रहा हूं। आपको हमारी मांग स्वीकार करने का अधिकार है। आपको कोई नहीं रोक सकता। आप प्रधानमंत्री हैं और 10 जनपथ के निर्देशों का इंतजार करने के बजाए अपने पद का इस्तेमाल कीजिए।"

आडवाणी ने कहा, "कृपया हमारी मांग मान लीजिए और आप जो भी कहना चाहें, जेपीसी के समक्ष कहिए।" आडवाणी ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री इसके लिए राजी नहीं होते हैं, तो 2010 भ्रष्टाचार और घोटालों के साल के रूप में याद किया जाएगा।

आडवाणी ने हालांकि प्रधानमंत्री पर निशाना तो साधा लेकिन उन्होंने उनके इस्तीफे की मांग करने से परहेज किया जबकि राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरूण जेटली ने प्रधानमंत्री से जेपीसी के गठन की मांग की और ऐसा न कर पाने की स्थिति में उन्हें पद छोड़ने की सलाह दी।

जेटली ने कहा कि सिर्फ जेपीसी ही इस बात का पता लगा सकती है कि दूसरी पीढ़ी के स्पेक्ट्रम को 2008 में बाजार कीमत से कम दर पर क्यों आवंटित किया गया। लेकिन प्रधानमंत्री ने कहा है कि वह लोक लेखा समिति (पीएसी) के समक्ष उपस्थित होने को तैयार हैं, और वह जेपीसी के गठन के खिलाफ हैं।

इस पर जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह प्रस्ताव विपक्ष को स्वीकार नहीं है, और यदि वह इस घोटाले में जेपीसी का सामना नहीं करना चाहते तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए।

राजग संयोजक शरद यादव ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, "खुद को निर्दोष बताकर प्रधानमंत्री अपनी जिम्मेदारी से कैसे मुक्त हो सकते हैं। जेपीसी की हमारी मांग संवैधानिक है और ऐसा भी नहीं है कि पहली बार जेपीसी से किसी मामले की जांच कराई जानी है। इससे पहले भी चार मौकों पर जेपीसी का गठन हो चुका है। फिर यह सरकार जेपीसी से क्यों भाग रही है।"

भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने भी कांग्रेस और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की तीखी आलोचना की।

स्वराज ने कहा, "आखिर उन्हें जेपीसी से डर क्यों लग रहा है।" उन्होंने कहा कि अब तक विभिन्न घोटालों की जांच के लिए चार जेपीसी गठित हो चुकी है। दो जेपीसी पूर्व की कांग्रेस सरकारों के दौरान गठित हुई थी।

स्वराज ने कहा, "नीरा राडिया के टेप ने सरकार, संसद, न्यायपालिका और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ (पत्रकारिता) में व्याप्त गंदगी को बेनकाब कर दिया है।"

स्वराज ने कहा, "हम जो सवाल उठा रहे हैं, उसका जवाब न तो पीएसी दे सकती है और न सर्वोच्च न्यायालय ही। यदि उनके पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है तो फिर वे जेपीसी से डर क्यों रहे हैं?"

रैली में भाजपा और जनता दल (युनाइटेड) के अलावा शिव सेना और अकाली दल ने भी हिस्सा लिया। शिव सेना के अनंत गीते ने भी प्रधानमंत्री को निशाने पर लेते हुए कहा कि उनकी सरकार हिन्दू आतंकवाद के नाम पर पूरे देश में दंगे करवाना चाहती है और खुद इसका राजनीतिक लाभ लेना चाहती है।

अकाली दल के रतन सिंह अजनाला ने सीधे तौर पर कहा कि कांग्रेस ने जितना देश को लूटा है उतना तो किसी ने भी नहीं लूटा। उन्होंने कहा कि देश को मुगलों ने लूटा, फिर अंग्रेजों ने लूटा और अब कांग्रेस लूट रही है। इसलिए आए दिन घोटाले हो रहे हैं।

इसके पहले विपक्ष ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जेपीसी जांच की मांग को लेकर संसद का पूरा शीतकालीन सत्र नहीं चलने दिया था। उल्लेखनीय है कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में अनियमितताओं के आरोपों के कारण केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए.राजा को इस्तीफा देना पड़ा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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