गुर्जरों को 5 प्रतिशत आरक्षण देने की याचिका खारिज

उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति महेश भगवती की खंडपीठ ने कहा कि गुर्जरों को विशेष आरक्षण नहीं दिया जा सकता।

खंडपीठ ने कहा कि सरकार जिस आधार पर आरक्षण की मांग कर रहे समुदाय को विशेष आरक्षण देने के लिए कह रही है, उसे वह न्यायालय को समझाने में असफल साबित हुई है।

न्यायालय ने कहा कि सरकार इस समुदाय को सरकारी नौकरियों में एक प्रतिशत आरक्षण देना जारी रख सकती है। इस आरक्षण को विशेष पिछड़ा वर्ग श्रेणी के तहत दिया गया है।

जी. शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने सरकार से एक वर्ष के भीतर गुर्जरों और अन्य समुदायों रयकास, रयबारी और गाड़िया लोहार की आर्थिक स्थिति का ब्यौरा जुटाने के लिए कहा।

उधर, न्यायालय के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति (गैस) के समन्वयक कर्नल(सेवानिवृत्त) के.एस. बैंसला ने कहा कि समुदाय अपना आंदोलन तेज करेगा।

बैंसला ने आईएएनएस को फोन पर बताया, "सरकार न्यायालय में हमारे मामले को उचित तरीके से रखने में असफल हुई है। हम पांच प्रतिशत आरक्षण चाहते हैं। हमें इस बात से कोई मतलब नहीं है कि न्यायालय क्या कहता है। हमारी मांग न्यायालय से नहीं सरकार से है। हम अपना संघर्ष आरक्षण मिलने के बाद ही समाप्त करेंगे।"

बैंसला ने समुदाय से दिल्ली में दूध की आपूर्ति रोकने के लिए कहा है। उन्होंने कहा, "हमें अपना आंदोलन तेज करने के लिए बाध्य किया गया है। हम दिल्ली को दूध की आपूर्ति बंद करने के साथ ही मुख्य राजमार्गो को बंद करना शुरू करेंगे।"

उल्लेखनीय है कि गुर्जर समुदाय के आंदोलन के चलते बुधवार को भी दिल्ली और मुम्बई के बीच रेलगाड़ियों का संचालन प्रभावित हुआ।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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