प्रधानमंत्री जेपीसी का सामना करें या इस्तीफा दें : भाजपा (लीड-1)
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की ओर से यहां रामलीला मैदान में आयोजित एक रैली को सम्बोधित करते हुए जेटली ने कहा कि सिर्फ जेपीसी ही इस बात का पता लगा सकती है कि दूसरी पीढ़ी के स्पेक्ट्रम को 2008 में बाजार कीमत से कम दर पर क्यों आवंटित किया गया।
लेकिन प्रधानमंत्री ने कहा है कि वह लोक लेखा समिति (पीएसी) के समक्ष उपस्थित होने को तैयार हैं, और वह जेपीसी के गठन के खिलाफ हैं।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह प्रस्ताव विपक्ष को स्वीकार नहीं है, और यदि वह इस घोटाले में जेपीसी का सामना नहीं करना चाहते तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए।
भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने भी कांग्रेस और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की तीखी आलोचना की।
स्वराज ने कहा, "आखिर उन्हें जेपीसी से डर क्यों लग रहा है।" उन्होंने कहा कि अब तक विभिन्न घोटालों की जांच के लिए चार जेपीसी गठित हो चुकी है। दो जेपीसी पूर्व की कांग्रेस सरकारों के दौरान गठित हुई थी।
स्वराज ने कहा, "नीरा राडिया के टेप ने सरकार, संसद, न्यायपालिका और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ (पत्रकारिता) में व्याप्त गंदगी को बेनकाब कर दिया है।"
स्वराज ने कहा, "हम जो सवाल उठा रहे हैं, उसका जवाब न तो पीएसी दे सकती है और न सर्वोच्च न्यायालय ही। यदि उनके पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है तो फिर वे जेपीसी से डर क्यों रहे हैं?"
भाजपा, राजग के अपने सहयोगियों के साथ भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर बुधवार को सड़क पर उतरी। राजग के सभी घटक दलों के नेताओं ने रामलीला मैदान में आयोजित रैली में हिस्सा लिया।
इसके पहले विपक्ष ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जेपीसी जांच की मांग को लेकर संसद का पूरा शीतकालीन सत्र नहीं चलने दिया था। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में अनियमितता के आरोपों के कारण केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए.राजा को इस्तीफा देना पड़ा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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