विकिलीक्स खुलासा : बांग्लादेशी सुरक्षा बल मानवाधिकार उल्लंघन का आरोपी
लंदन, 22 दिसम्बर (आईएएनएस)। विकिलीक्स द्वारा लीक किए गए एक अमेरिकी राजनयिक संदेश में बांग्लादेशी अर्धसैन्य बल, रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) का उल्लेख "कथित मानवाधिकार उल्लंघनों" के आरोपी के रूप में किया गया है। जबकि इस बल को ब्रिटेन ने प्रशिक्षण दिया है।
ब्रिटिश समाचार पत्र 'गार्जियन' ने एक अमेरिकी राजनयिक संदेश के हवाले से कहा है कि ब्रिटिश सरकार आरएबी को प्रशिक्षण देती रही है, जिसे मानवाधिकार संगठनों ने "सरकारी मौत दस्ता" करार दिया है।
मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि आरएबी के जवानों को खोजी पूछताछ तकनीक और आदान-प्रदान के नियमों में ब्रिटिश प्रशिक्षण हासिल हुआ है।
एक संदेश में कहा गया है कि अमेरिका आरएबी को मानवाधिकार प्रशिक्षण के अलावा और कोई सहायता नहीं देगा।
ढाका स्थित अमेरिकी राजदूत ने संदेशों में कहा है कि अमेरिका सरकार आरएबी के कथित मानवाधिकार उल्लंघनों से लाचार है। मानवाधिकार उल्लंघनों ने इस संगठन को प्रशिक्षण या सहायता पाने के अयोग्य बना दिया है। अमेरिकी कानून उन विदेशी सैन्य इकाइयों को वित्तीय सहायता या प्रशिक्षण मुहैया कराने की मनाही करते हैं, जो खुलेआम मानवाधिकार उल्लंघनों में लिप्त होती हैं।
कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि छह वर्ष पहले जब से आरएबी की स्थापना हुई है, तब से यह संगठन 1,000 से अधिक न्यायेतर हत्याओं के लिए जिम्मेदार रहा है। पिछले वर्ष सितम्बर में आरएबी के महानिदेशक ने कहा था कि उनके जवानों ने जवाबी गोलीबारी में 577 लोगों को मारा है। इस वर्ष मार्च में उन्होंने इस आकड़े में सुधार करते हुए कहा कि उनके जवानों ने 622 लोगों को मारा था।
संदेशों में हालांकि यह भी कहा गया है कि ब्रिटेन और अमेरिका, दोनों इस संगठन को मजबूत बनाने के पक्ष में थे और उन्होंने कहा था कि "पिछले दशक के दौरान कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति से डरी हुई आबादी की ओर से आरएबी को सम्मान और प्रशंसा मिलती है।"
ढाका स्थित अमेरिकी राजदूत, जेम्स मोरियार्टी ने एक संदेश में कहा था कि "आरएबी एक दिन अमेरिकी फेडरल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन का बांग्लादेशी संस्करण बनने की सर्वोत्तम स्थिति में है।"
एक अन्य संदेश में मोरियार्टी ने ब्रिटिश अधिकारियों के हवाले से कहा है कि ब्रिटेन "आरएबी को खोजी पूछताछ तकनीक और आदान-प्रदान के नियम जैसे विषयों में 18 महीने से प्रशिक्षण दे रहा है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications