महिला सम्पत्ति अधिकार के लिए मंजरी फिर मैदान में

रेकोंग पेओ (हिमाचल प्रदेश), 22 दिसम्बर (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में सामाजिक कार्यकर्ता, रतन मंजरी (57) ने एक दशक बाद फिर जनजातीय महिलाओं के लिए पैतृक सम्पत्ति में अधिकार की लड़ाई लड़ने हेतु कमर कसी है।

मंजरी, पुरुष प्रधान उन कानूनों के खिलाफ उठ खड़ी हुई हैं, जो जनजातीय महिलाओं को राज्य में पैतृक सम्पत्ति पाने से रोकते हैं। मंजरी कहती है कि महिलाओं के सशक्तीकरण में और उनके जीवन को सम्मानजनक बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।

किन्नौर, लाहौल और स्पीति जिलों के जनजातीय कानून में महिलाओं को अपने माता-पिता या पति की सम्पत्ति में हकदारी का प्रावधान नहीं है।

पूह ब्लाक से लगातार दूसरी बार जिला परिषद की स्वतंत्र सदस्य निर्वाचित होने वाली मंजरी ने आईएएनएस को बताया, "जनजातीय कानून के खिलाफ मेरी लड़ाई जारी रहेगी। दूरवर्ती इलाकों में रहने वाली अधिकांश महिलाओं को शिक्षित होने और सामाजिक सम्मान हासिल करने के लिए प्रेरित होने की जरूरत है।"

मंजरी, 28 दिसम्बर को होने वाले पंचायत चुनाव में एक बार फिर मैदान में हैं।

मंजरी ने कहा कि यह जरूरी है कि सबसे पहले महिलाओं का मन-मस्तिष्क बदला जाए। उसके बाद कानून में परिवर्तन के लिए सरकार पर दबाव बनाया जाए।

ज्ञात हो मंजरी ने एक दशक से अधिक समय पहले पूरे किन्नौर जिले में मुट्ठीभर समर्पित साथियों के साथ बहुपति प्रथा के खिलाफ और जनजातीय महिलाओं के सम्पत्ति अधिकार को लेकर एक जागरूकता अभियान चलाया था।

मंजरी ने कहा, "महिलाओं को अधिक संवेदनशील बनाने के लिए हर गांव में जाने की जरूरत है। गांवों की अधिकांश महिलाएं निरक्षर हैं और गुमनामी में जीवन जीती हैं। वे पुरुष प्रधान समाज के खिलाफ खड़ा नहीं होना चाहतीं। विधाओं की स्थिति बहुत बुरी है और उनकी संख्या बढ़ती जा रही है।"

राजधानी शिमला से कोई 250 किलोमीटर दूर रिब्बा गांव निवासी सेब उत्पादक मंजरी कहती हैं, "मेरी मां ने पूरी खेती की जमीन मेरे भाइयों के बदले मेरे नाम कर दी। मेरे समुदाय में यह एक अपवाद जैसा था। लेकिन यदि यह मेरे मामले में सम्भव है, तो बाकी जनजातीय महिलाओं के लिए भी ऐसा सम्भव हो सकता है।"

मंजरी ने कहा, "परम्परागत कानूनों के अनुसार पैतृक सम्पत्ति में केवल पुरुषों को हिस्सेदारी का अधिकार है। यहां तक कि पत्नी को भी अपने पति की सम्पत्ति में अधिकार नहीं है। सारी सम्पत्ति सीधे बेटों के नाम हो जाती है।"

मंजरी, किन्नौर जिले में स्थित महिला अधिकार संगठन, महिला कल्याण परिषद की अध्यक्ष भी हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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