भूख हड़ताल से घबराई कांग्रेस, 400 करोड़ रुपये के राहत की घोषणा (राउंडअप)

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तबाही का दंश झेल रहे आंध्र प्रदेश के किसानों के लिए 400 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की यह घोषणा की। उन्होंने हालांकि इस संकट को राष्ट्रीय आपदा अभी तक घोषित नहीं की है जबकि प्रमुख राजनीतिक दल इसकी मांग कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने यह घोषणा उस वक्त की है जब इस मुद्दे पर नायडू की भूख हड़ताल मंगलवार को पांचवें दिन पहुंच गई और जगनमोहन ने मंगलवार को ही 48 घंटे के भूख हड़ताल पर जाने की घोषणा कर दी।

इससे पहले, वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी आंध्र के किसानों के मुद्दे पर प्रधानमंत्री से भेंट की थी और राहत पैकेज घोषित किए जाने की मांग की थी।

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव प्रकाश करात ने भी आज ही प्रधानमंत्री को पत्र लिख आंध्र प्रदेश में जारी कृषि संकट को राष्ट्रीय आपदा घोषित किए जाने की मांग की थी।

जगनमोहन द्वारा कृष्णा नदी के किनारे शुरू की गई 48 घंटे की भूख हड़ताल में शामिल होने के लिए यहां हजारों की संख्या में लोग पहुंचे।

दरअसल, पिछले महीने कांग्रेस छोड़ने के बाद जगन ने पहली बार अपनी इस ताकत का प्रदर्शन किया। जगन ने यह भूख हड़ताल प्रकासम बैरेज के समीप कृष्णा नदी के किनारे एक लाख किसानों और समर्थकों के साथ शुरू की।

इस भूख हड़ताल में अभिनेत्री जयोसुधा, विधान परिषद के तीन सदस्य, कुछ पूर्व मंत्रियों सहित विधानसभा के 10 सदस्य शामिल हुए। इनके अलावा कुछ सांसदों ने भी भूख हड़ताल में शिरकत की।

जगन के इस भूख हड़ताल को 'लक्ष दीक्षा' (एक लाख लोगों द्वारा भूख हड़ताल) नाम दिया गया। इसे व्यापक समर्थन मिला। राज्य के विभिन्न हिस्सों से लोग इस भूख हड़ताल में शामिल होने के लिए पहुंचे।

लोगों की बढ़ती भीड़ को संभालना आयोजकों के लिए मुश्किल हो रहा था। आयोजक लोगों से मंच की तरफ न बढ़ने की अपील कर रहे थे।

राज्य के कृष्णा जिले में दुर्गा मंदिर में प्रार्थना करने के बाद जगन प्रशांती एक्सप्रेस से प्रकासम बैराज पहुंचे। यहां उनके समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया।

राज्य के तटीय इलाके, रायलसीमा और तेलंगाना के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों लोग जगन के समर्थन के लिए प्रकासम बैराज पहुंचे।

प्रकासम बैराज पहुंचने के बाद जगन ने मंच पर रखे अपने पिता के चित्र पर माल्यार्पण किया। मंच पर उनके अलावा राज्य के नौ विधायक, कई पूर्व मंत्री और सांसद भी मौजूद थे। तेदेपा की पूर्व नेता और अभिनेत्री रोजा और तेदेपा के संस्थापक एन.टी. रामाराव की पत्नी लक्ष्मी पार्वती भी मंच पर उपस्थित थीं।

उल्लेखनीय है कि 45 दिनों के भीतर नई पार्टी की घोषणा करने का पहले ही ऐलान कर चुके जगन ने इस भूख हड़ताल के माध्यम से अपनी क्षमता दिखाने का प्रयास किया।

उधर, राज्य के कृषि मंत्री और जगन के चाचा वाई.एस. विवेकानंद ने उनकी इस कार्रवाई की आलोचना की है और उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार ने किसानों के लिए जो मुआवजे की घोषणा की है वह देश में सबसे ज्यादा है।

जगन की यह भूख हड़ताल उस समय शुरू हुई जब चंद्रबाबू नायडू पहले ही किसानों की मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे।

नायडू की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल मंगलवार को भी जारी रही। चिकित्सकों ने उनकी स्थिति पर चिंता प्रकट की।

नायडू को सोमवार तड़के न्यू एमएलए क्वार्टर्स से गिरफ्तार कर निजाम चिकित्सा विज्ञाान संस्थान में भर्ती कराया गया था लेकिन उन्होंने इलाज कराने से इंकार कर दिया था। नायडू का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को स्वीकार नहीं कर लेती तब तक उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी।

उधर, राज्य सरकार से कोई संकेत नहीं मिला है जिससे पता चले कि क्या वह पिछले सप्ताह विधानसभा में की गई घोषणा से अधिक मुआवजा किसानों को देगी या नहीं।

नायडू के निजी चिकित्सक बी. सोमाराजू ने मंगलवार को उनकी स्वास्थ्य की जांच की। उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि नायडू की स्थिति लगातार खराब हो रही है क्योंकि वह न तो कुछ खा रहे हैं और न ही इलाज करा रहे हैं।

सोमाराजू ने कहा कि तेदेपा प्रमुख यदि अपनी भूख हड़ताल जारी रखते हैं तो उनकी स्थिति और खराब हो सकती है।

नायडू राज्य सरकार से मांग कर रहे हैं कि वह किसानों की इस क्षति को राष्ट्रीय आपदा घोषित करे साथ ही खाद्य फसलों के नुकसान के लिए प्रति एकड़ के हिसाब से 10,000 रुपये तथा व्यावसायिक फसलों के लिए 15,000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दे।

सरकार द्वारा घोषित किए गए मुआवजे को अल्प करार देते हुए नायडू ने गत शुक्रवार को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी थी।

उधर, तेदेपा कार्यकर्ताओं ने दूसरे दिन भी अपने नेता की गिरफ्तारी के विरोध में बंद का आयोजन किया।

इस बीच, प्रकाश करात ने मंगलवार को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री से आंध्र प्रदेश में जारी कृषि संकट को राष्ट्रीय आपदा घोषित किए जाने की मांग की।

प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में करात ने कहा, "राज्य में कृषि को बचाने और किसानों को राहत पहुंचाने के लिए आप (प्रधानमंत्री) न सिर्फ हस्तक्षेप करें बल्कि राज्य सरकार का सहयोग भी करें। "

उन्होंने कहा, "आंध्र प्रदेश की स्थिति की गम्भीरता को देखते हुए वहां राष्ट्रीय आपदा घोषित की जानी चाहिए।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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