भारत-रूस के बीच कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर (लीड-2)

रूस ने इस दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत के दावे का समर्थन किया और साथ ही पाकिस्तान से 26/11 के षडयंत्रकारियों को दंडित करने को कहा।

दोनों देशों के बीच व्यापार के स्तर को वर्ष 2015 तक 20 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित करते हुए दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि वे अपने सम्बंधों के उन आर्थिक आयामों को और प्रगाढ़ करेंगे, जो सामरिक सम्बंधों की तरह अब तक परवान नहीं चढ़ सके हैं। इसके मद्देनजर दोनों देशों के बीच करोड़ों डॉलर का करार हुआ।

इसके अलावा विज्ञान, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल, संस्कृति और दवाइयों के क्षेत्र में भी कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।

दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर देर रात नई दिल्ली पहुंचे रूसी राष्ट्रपति दमित्रि मेदवेदेव और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की उपस्थिति में इन समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।

विज्ञान व तकनीकी सम्बंधों को और मजबूती देने के मकसद से भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग और रूस के परमाणु ऊर्जा सहयोग विभाग रोसएटम के बीच सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए। तेल व ऊर्जा क्षेत्र में भी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों में समझौता ज्ञापन हुआ।

भारत और रूस ने पांचवी पीढ़ी के अत्याधुनिक चुपके से मार करने वाले (स्टील्थ) लड़ाकू विमान की डिजाइन तैयार करने व उसके उत्पादन की संयुक्त परियोजना को मंजूरी दी है। इसके तहत दोनों देशों ने एक प्राथमिक डिजाइन करार पर हस्ताक्षर किया।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान (एफजीएफए) के लिए हुए प्राथमिक डिजाइन करार के तहत लड़ाकू विमान की संयुक्त रूप से डिजाइन तैयार करना और उनका विकास करना शामिल है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रूसी राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव के बीच यहां हुई बातचीत के बाद इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

बयान में कहा गया है कि इस परियोजना को भारत के हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और रूस के सुखोई डिजाइन ब्यूरो व रोसोबोरोनेक्सपोर्ट द्वारा संयुक्त रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।

भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के अधिकारियों के अनुसार 30 टन वजन वाले इस विमान के पास दक्षता और मारक क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत ही उन्नत तकनीक होगी। यह विमान हवा से हवा में, हवा से जमीन पर और हवा से पोत पर मिसाइलें दागने में सक्षम होगा।

एक एफजीएफए के निर्माण पर कम से कम 10 करोड़ डॉलर की लागत आएगी और वायु सेना 2017-18 से इस तरह के कोई 300 विमानों को अपने बेड़े में शामिल करने की योजना में है। यह कुल 30 अरब डॉलर का सौदा होगा। भारत की अब तक की यह सबसे बड़ी रक्षा परियोजना होगी।

इससे पहले, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और मेदवेदेव के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई जो लगभग दो घंटों तक चली। इस दौरान विभिन्न मुद्दों पर दोनों देशों के बीच वार्ता हुई, जिनमें नागरिक परमाणु सहयोग, द्विपक्षीय आर्थिक रिश्तों में तेजी लाना, वैश्विक आतंकवाद और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संकट भी शामिल था।

बाद में एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए मेदवेदेव ने कहा, "रूस चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सीट मिले।"

रूस ने एनएसजी और मिसाइल टेक्न ोलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) में भारत की सदस्यता के दावे का भरपूर समर्थन किया। इसके साथ ही तमिलनाडु में अतिरिक्त परमाणु रिएक्टर स्थापित करने, अंतरिक्ष विज्ञान में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

प्रधानमंत्री ने कहा, "दोनों देशों ने तमिलनाडु के कुदनकुलम में अतिरिक्त परमाणु रिएक्टर स्थापित करने को लेकर चर्चा की।"

सिंह ने कहा, "इससे रक्षा और असन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में मजबूत सहयोग की हमारी आपसी इच्छा जाहिर होती है।"

ज्ञात हो कि सरकारी परमाणु कम्पनी, रोसएटम की सहयोगी इकाई एटमस्ट्रोयएक्सपोर्ट, भारतीय परमाणु विद्युत निगम लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के साथ मिल कर कुदनकुलम में 1,000 मेगावाट के दो रिएक्टर स्थापित कर रही है और इसके अलावा अतिरिक्त रिएक्टर लगाने के लिए बातचीत कर रही है।

दोनों देशों की ओर से जारी एक संयुक्त बयान में आतंकवाद को समाप्त करने के मुद्दे पर सहयोग बढ़ाने की भी बात कही गई। बयान में कहा गया, "दोनों पक्ष सभी आतंकवादी ढांचों को नष्ट करने पर सहमत हुए हैं। दोनों ने पाकिस्तान से कहा है कि वह 26/11 के मुम्बई हमले के दोषियों व षडयंत्रकारियों को दंडित करे।"

संवाददाता सम्मेलन के दौरान मेदवेदेव ने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा, "कोई भी सभ्य राष्ट्र आतंकवादियों को बचाने का काम नहीं कर सकता।"

आईएएनएस द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "आतंकवादी अपराधी हैं। निश्चित तौर पर उन्हें दंडित किया जाना चाहिए। जो आतंकवादियों को छुपाते हैं, वे अपने अपराधों पर पर्दा डालते हैं। कोई भी सभ्य राष्ट्र आतंकवादियों को बचाने का काम नहीं कर सकता।"

मेदवेदेव ने कहा, "हमारा सहयोग खुला है। हम इस सहयोग को मजबूत करने को इच्छुक हैं।"

मनमोहन सिंह ने इस मौके पर कहा, "भारत और रूस दोनों ही आतंकवाद से पीड़ित हैं। इसलिए इस खतरे से निपटने में दोनों देशों के प्राकृतिक हित शामिल हैं। प्रभावी तरीके से इससे निपटने के लिए हमें सूचना और खुफिया जानकारियों का आदान-प्रदान करना चाहिए।"

दोनों देश अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता लाने के लिए अपना सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हुए।

प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत के बाद मनमोहन सिंह ने कहा, "हमने अफगानिस्तान पर अपनी रायशुमारी तेज करने पर सहमति जताई है।"

प्रधानमंत्री ने रूस को भारत का एक समयसिद्ध साझेदार बताया।

सिंह ने कहा कि विविधरंगी द्विपक्षीय सम्बंध हमारे रिश्ते की प्रगाढ़ता का प्रतीक है। उन्होंने कहा, "हमारी एक विशेष और रणनीतिक साझेदारी है।" सिंह ने कहा कि दोनों देशों के बीच 11वीं शिखर बैठक में व्यापक बातचीत हुई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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