मस्तिष्क में होती है झूठ पकड़ने वाली प्राकृतिक मशीन
मानव में सामाजिक आदतों से सीखने और दूसरे लोग क्या सोच रहे हैं इसका अनुमान लगा सकने की क्षमता होती है। इसके कारण यदि कुछ गड़बड़ होता है तो उन्हें पता चल जाता है।
इस खोज का उपयोग यह जानने में किया जा सकता है कि कुछ लोग हमेशा दूसरों से आशंकित क्यों रहते हैं।
इस खोज के लिए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने लोगों को दो में से एक डिब्बे का चुनाव करने के लिए कहा। सही चुनाव करने पर उन्हें कुछ अंक मिल सकते थे। इस दौरान उन्होंने उनके मस्तिष्क में चल रही हलचल का अध्ययन किया।
समाचार पत्र डेली मेल के अनुसार हर प्रतियोगी को उसके प्रतिस्पद्र्धी द्वारा सही डिब्बे के बारे में सलाह भिजवाई गई और देखा गया कि उनकी सलाह पर प्रतियोगी के मस्तिष्क में किस प्रकार का हलचल होता है।
यह देखा गया कि जब प्रतियोगी को सलाह देने वाले की सच्चाई पर भरोसा नहीं था, तो उसके मस्तिष्क के अगले भाग में तेज हलचल देखी गई। वहीं यदि प्रतियोगी को सलाह देने वाले पर भरोसा था, तो प्रतियोगी के मस्तिष्क का अगला हिस्सा अपेक्षाकृत शांत रहा।
प्रमुख वैज्ञानिक मथ्यु रशवर्दी ने कहा कि मस्तिष्क के उस हिस्से का ठीक-ठीक पता लगाने की कोशिश की जा रही है, जहां से सामाजिक आदतों को सीखने की प्रक्रिया नियंत्रित होती है।
इस माह के शुरू में सेल प्रेस लैबलिंक्स सम्मेलन में इस अध्ययन को प्रस्तुत किया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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