गुर्जर आंदोलन के कारण दिल्ली-मुम्बई रेलमार्ग बाधित
गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल के.एस.बैंसला के नेतृत्व में आयोजित महापंचायत के बाद गुर्जर समुदाय के लोगों ने सोमवार को रेल चक्का जाम करने का निर्णय लिया। निर्णय के बाद सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी पिल्लू का पुरा में रेल पटरी पर धरने पर बैठ गए, परिणामस्वरूप इस मार्ग से जाने वाली कुछ रेलगाड़ियों का मार्ग बदल दिया गया और कुछ को रद्द कर दिया गया।
रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "हमने स्थिति की समीक्षा करने के बाद सुरक्षा कारणों से उस इलाके में रेल गाड़ियों का आवागमन रोक दिया है।"
अधिकारी ने कहा कि इस आंदोलन का सबसे बुरा असर, दिल्ली-मुम्बई मार्ग पर पड़ा है। इस मार्ग की लगभग 22 रेलगाड़ियां प्रभावित हुई हैं। कुछ रेलगाड़ियों को रद्द भी कर दिया गया है।
अधिकारी ने कहा कि जयपुर-बयाना सेक्टर के बीच चलने वाली एक यात्री रेलगाड़ी को गंगापुर में रोक दिया गया है।
उत्तर प्रदेश के मथुरा और राजस्थान के भरतपुर के बीच रेलगाड़ियों का आवागमन प्रभावित होने से सैकड़ों यात्री मंगलवार को फंस गए हैं।
एक रेल अधिकारी ने कहा, "प्रदर्शनकारी भरतपुर के पास पिल्लू का पुरा में रेल पटरी पर बैठे हुए हैं, लिहाजा रेलगाड़ियों का मार्ग बदल दिया गया है। इस कारण मथुरा, आगरा और भरतपुर में यात्री फंस गए हैं।"
राजधानी एक्सप्रेस सहित कोई आधा दर्जन रेलगाड़ियों को सोमवार की शाम आगरा छावनी रेलवे स्टेशन की ओर मोड़ दिया गया। रेल पटरियों को क्षतिग्रस्त किए जाने की भी खबरें हैं।
सूचना के मुताबिक 15,000 से अधिक की संख्या में गुर्जरों ने सोमवार को विरोध प्रदर्शन शुरू किया।
बैंसला ने कहा है कि आरक्षण सम्बंधी उनकी मांग माने जाने तक गुर्जर अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
बैंसला ने कहा, "जब तक राज्य सरकार पांच प्रतिशत आरक्षण, गुर्जर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों को वापस लेने व जेलों से उनकी रिहाई सम्बंधी मांगों को नहीं मान लेती, तब तक हम राज्यभर में अपना शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखेंगे।"
दूसरी ओर राज्य सरकार ने चेतावनी दी है कि सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार देर रात पुलिस महानिदेशक, मुख्य सचिव और गृह मंत्री के साथ स्थिति की समीक्षा की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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