मप्र का किसान कितना खुशहाल, यही है सवाल

भोपाल, 21 दिसम्बर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश सरकार लगातार खेती को फायदे का धंधा बनाने के वादे करने से नहीं अघाती है तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद को 'किसान पुत्र' बताते हैं, मगर किसान कितना खुशहाल है, यह सोमवार को जाहिर हो गया जब किसानों ने राजधानी भोपाल की रफ्तार को ही थाम दिया। इतना ही नहीं सरकार की पेशानी पर बल पड़ गए और वह किसानों को समझाने में नाकाम साबित हो रही है।

किसान का हाल क्या है, यह उसके अंदाज को देखकर ही लगाया जा सकता है, राजधानी की सड़कों पर उतरे किसान के हाथ में डंडा है तो चेहरे पर गुस्से का गुबार है। वह कहता है कि उसे महज छह घंटे भी बिजली नहीं मिल पा रही है और राजधानी में 24 घंटे तो संभागीय मुख्यालय को 22 घंटे बिजली दी जा रही है। यह किसानों के साथ अन्याय नहीं तो और क्या है।

एक तरफ बिजली उसके लिए मुसीबत बना है तो घटिया बीज व नकली खाद तक मिल रही है। इतना ही नहीं मनमाने बिजली के बिल थोपने के अलावा चोरी के मामले दर्ज करने में हिचक नहीं दिखाई जा रही है। किसानों की समस्याओं को उठाने के लिए कोई तैयार भी नजर नहीं आता है, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी किसानों के दर्द से अनजान बनी हुई है।

किसान गुस्से से भरा हुआ है और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से नाता रखने वाले भारतीय किसान संघ ने किसानों की समस्या को लेकर भोपाल में प्रदर्शन किया तो उसका गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। किसानों ने भोपाल की रफ्तार ही थाम दी। किसान एक दिन नहीं कई दिनों तक सड़क पर डेरा डाले रहने की तैयारी से आए हैं। अब वह आश्वासन मानने की बजाय आदेश की बात पर अड़ गए।

सरकार इस बात को लेकर खासी चिंतित है कि उसी की विचारधारा वाले संगठन की अगुवाई में किसान सड़क पर है और वह इस स्थिति से कैसे निपटे। सरकार की ओर से गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता, सहित एक संगठन के पदाधिकारी ने किसान नेताओं को मनाने की कोशिश की मगर वे लिखित आदेश के बिना सड़क पर से हटने को तैयार नहीं हुए।

किसानों का आंदोलन सरकार को यह एहसास करा रहा है कि वह गांव, किसान तथा गरीब को खुशहाल करने का नारा देने में पीछे नहीं रहती और यही किसान अपनी समस्याओं से इतना आजिज आ चुका है कि राजधानी की सड़कों को जाम कर दिया है।

भारतीय किसान संघ के नेता शिव कुमार शर्मा का कहना है कि उनकी 50 प्रमुख मांगे हैं सरकार उनको पूरा करने का लिखित में आदेश दे और शेष पूरा करने के लिए वक्त ले भी ले तो वे आंदोलन की राह से हट सकते हैं।

स्ांभवत: प्रदेश की राजधानी भोपाल में यह पहला मौका है जब इतनी बड़ी तादाद में किसानों ने सड़क पर उतरकर अपने गुस्से का इजहार किया हो। किसानों ने इस बात का साफ संकेत दे दिया है कि वे यहां एक दिन के प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि लंबी लड़ाई लड़ने के लिए आए हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सíवस।

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