बगदाद में बंद है सद्दाम के खून से लिखी कुरान
समाचार पत्र 'द गार्जियन' के मुताबिक नब्बे के दशक के अंत में दो सालों के दौरान एक नर्स ने सद्दाम हुसैन के शरीर से उनका 27 लीटर खून निकाला था। बाद में कुरान लिखने में इस खून का इस्तेमाल किया गया था।
बगदाद की एक बड़ी सी मस्जिद में तीन गुंबदनुमा दरवाजों के पीछे रखी यह कुरान पिछले तीन सालों से तालों में बंद है।
इराक के सुन्नी कोष के प्रमुख शेख अहमद अल-समारी कहते हैं, "जो यहां है वह अनमोल है, इसकी कीमत लाखों डॉलर होगी।"
उन्होंने कहा कि सद्दाम हुसैन ने जो किया वह गलत था और कुरान को खून से लिखना हराम है।
अमेरिका के नेतृत्व में 2003 में इराक पर आक्रमण के बाद समराई ने इस कुरान के कुछ पन्ने अपने घर में और कुछ अपने रिश्तेदारों के घर में छुपा दिए थे।
उन्होंने कहा कि अब इसे देखना भी आसान नहीं है। जिन दरवाजों के अंदर यह कुरान रखी गई है, उसकी तीन चाबियां है। इनमें से एक चाबी खुद समराई के पास, दूसरी उस इलाके के पुलिस प्रमुख और तीसरी बगदाद के एक अन्य स्थान में है। उन्होंने बताया कि इन दरवाजों को खोलने से पहले एक समिति की इजाजत लेना जरूरी है।
सद्दाम हुसैन को 2006 में मौत की सजा दी गई थी।
इराकी प्रधानमंत्री नूरी-अल-मलिकी के प्रवक्ता अली अल-मुसावी का कहना है कि इस कुरान को सद्दाम की क्रूरता के दस्तावेज के रूप में रखा जाएगा क्योंकि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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