भारत-रूस के बीच 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को लेकर समझौता
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान (एफजीएफए) के लिए हुए प्राथमिक डिजाइन करार के तहत लड़ाकू विमान की संयुक्त रूप से डिजाइन तैयार करना और उनका विकास करना शामिल है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रूसी राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव के बीच यहां हुई बातचीत के बाद इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा दोनों देशों के बीच 29 अन्य समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए। मेदवेदेव दो दिवसीय भारत दौरे पर हैं।
बयान में कहा गया है कि इस परियोजना को भारत के हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और रूस के सुखोई डिजाइन ब्यूरो व रोसोबोरोनेक्सपोर्ट द्वारा संयुक्त रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।
भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के अधिकारियों के अनुसार 30 टन वजन वाले इस विमान के पास दक्षता और मारक क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत ही उन्नत तकनीक होगी। यह विमान हवा से हवा में, हवा से जमीन पर और हवा से पोत पर मिसाइलें दागने में सक्षम होगा।
एक एफजीएफए के निर्माण पर कम से कम 10 करोड़ डॉलर की लागत आएगी, और वायु सेना 2017-18 से इस तरह के कोई 300 विमानों को अपने बेड़े में शामिल करने की योजना में है। यह कुल 30 अरब डॉलर का सौदा होगा। भारत की अब तक की यह सबसे बड़ी रक्षा परियोजना होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications