ठंड ने बढ़ाई प्रवासी पक्षियों की मुश्किलें
श्रीनगर, 20 दिसम्बर (आईएएनएस)। कश्मीर घाटी में तापमान शून्य से भी नीचे चले जाने की वजह से प्रवासी पक्षियों के लिए भोजन की समस्या पैदा हो गई हो गई है। ऐसे में उनके लिए दिन और रात के भोजन के रूप में धान की व्यवस्था की गई है।
गौरतलब है कि साइबेरिया, उत्तरी यूरोप, फिलीपीन्स, चीन और मध्य एशिया में कड़ाके की ठंड पड़ने पर हर साल हजारों की तादाद में प्रवासी पक्षी घाटी का रुख करते हैं।
कश्मीर के वन्य जीव संरक्षक गुलाम अहमद लोन के अनुसार इस बार हॉकरसर बर्ड रिजर्व में छह लाख और शॉलबुग बर्ड रिजर्व में तीन लाख से अधिक प्रवासी पक्षी आए हैं। लेकिन इस बार यहां भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है।
खासकर रात में तापमान शून्य से भी नीचे चले जाने के कारण झील व तालाब जम रहे हैं। ऐसे में पक्षियों को प्राकृतिक भोजन नहीं मिल पा रहा है। इसलिए उनके कृत्रिम भोजन के तौर पर धान की व्यवस्था की गई है। दिन में दो बार उन्हें यह मुहैया कराया जाता है। इसकी व्यापक व्यवस्था पहले ही कर ली गई है।
इन विपरीत परिस्थितियों में भी जीवन की राह तलाश लेने की पक्षियों की कुशलता का जिक्र करते हुए लोन बताते हैं कि कई बार पक्षियां एक जगह एकत्र होकर अपने शरीर की ऊष्मा से जमे बर्फ को पिघलाकर पानी का एक छोटा सा पुल तैयार कर लेती हैं।
शालाबुग बर्ड रिजर्व से सटे गांदेरबल जिले के 65 वर्षीय मास्टर हबीबुल्लाह के मुताबिक पक्षियों के यहां आने का सिलसिला हजारों सालों से है। इस साल सितंबर में भी बड़ी संख्या में यहां प्रवासी पक्षियों का आगमन हुआ।
हर साल शाम को वे अपने लॉन से बेटों और पोतों के साथ पक्षियों को आकाश में करतब करते देखते हैं और उसका आनंद लेते हैं। इन दिनों उनका अधिकतर वक्त इस बात की निगरानी में बीतता है कि कोई पक्षियों का शिकार न करे।
उधर, अधिकारियों का भी दावा है कि पक्षी विहार में शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध है। लोन इसके लिए अपने कर्मचारियों को धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने ऐसा सुनिश्चित किया। लोन के मुताबिक ज्यादातर शिकार तब होता है कि जब पक्षियां शाम को भोजन की तलाश में रिजर्व से बाहर निकलती हैं।
यह पूछे जाने पर कि बढ़ती ठंड को देखते हुए क्या पक्षियां मैदानी इलाकों की ओर दूसरे राज्यों का रुख कर सकती हैं? लोन ने कहा कि ऐसा संभव है, पर यह नहीं होगा। जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है, यहां बर्फबारी भी हो रही है, जो प्रवासी पक्षियों के लिए अच्छा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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