पीएसी बुलाए तो पेशी को भी तैयार : प्रधानमंत्री (राउंडअप)

इस मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराने की विपक्ष की मांग को फिर से खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार इन घोटालों की गहराई से जांच करा रही है और कोई भी बख्शा नहीं जाएगा।

दिल्ली के बुराड़ी में कांग्रेस के 83वें महाधिवेशन के अंतिम दिन अपने सम्बोधन में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन और 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन के मामले के हर पहलू की जांच का आश्वासन दिया तो संसद में विपक्ष के अड़ियल रवैये की आलोचना की। इस अवसर पर उन्होंने केंद्र सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं और साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व का बखान भी किया। अर्थव्यवस्था से लेकर पाकिस्तान के साथ सम्बंधों पर भी उन्होंने सरकारी दृष्टिकोण से कांग्रेस प्रतिनिधियों को अवगत कराया।

कुछ नहीं है छुपाने को :-

प्रधानमंत्री ने कहा, "सरकार राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन और 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन के मामले के हर पहलू की जांच करा रही है।" उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गलत संदेश दे रही है कि सरकार जेपीसी की मांग इसलिए नहीं मान रही है क्योंकि जेपीसी के पास प्रधानमंत्री से पूछताछ करने का अधिकार होता है। वह ऐसा कहना चाहती है, "मेरे पास कुछ छिपाने के लिए है।"

उन्होंने कहा, "मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि मेरे पास जनता से छिपाने के लिए कुछ नहीं है। इस कारण से मैंने पीएसी के अध्यक्ष को लिखा है कि मुझे पीएसी के समक्ष उपस्थित होने में खुशी होगी।"

उन्होंने कहा कि जेपीसी गठित करने की मांग से मामले की जांच में केवल देरी हो रही है। उन्होंने भरोसा दिया कि गहराई से इन मामलों की जांच होगी। "मैं आपसे वायदा करता हूं कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं गम्भीरता से मानता हूं कि प्रधानमंत्री को संदेह से परे होना चाहिए और इस कारण मैं पीएसी के समक्ष उपस्थित होने के लिए तैयार हूं, यद्यपि इस तरह की कोई मिसाल नहीं है।"

उन्होंने कहा, "हमने भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने की मुहिम शुरू कर दी है। राष्ट्र निश्चिंत रह सकता है कि हम भविष्य में भी ऐसा करते रहेंगे।"

उन्होंने कहा, "हम संसद में भ्रष्टाचार से जुड़े सभी मसलों पर चर्चा कराना चाहते थे लेकिन पूरा सत्र विपक्ष के अड़ियल रवैये के कारण बर्बाद हो गया।" उन्होंने कहा कि पीएसी के पास वे सारे अधिकार मौजूद हैं जो जेपीसी के पास होते हैं।

मार्च तक 5.5 फीसदी होगी महंगाई दर:-

प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले वर्ष के शुरुआती महीनों में मुद्रास्फीति की दर घटकर 5.5 फीसदी पर आ जाएगी। "महंगाई घटाने के लिए हमने सभी कदम उठाए हैं और ये कदम जारी रहेंगे। अगले वर्ष मार्च तक संभावना है कि महंगाई दर 5.5 फीसदी पर आ जाएगी।"

खाद्य सुरक्षा और शिक्षा पर दिया जोर:-

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार खाद्य सुरक्षा कानून बनाने और शिक्षा के अधिकार कानून को क्रियान्वित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि देश का कोई भी नागरिक भूखा न सोए। हम राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अच्छे मानसून के कारण इस वर्ष देश में गेहूं और चावल का अच्छा उत्पादन होगा और अब सरकार का ध्यान खाद्यान्नों के वितरण पर है ताकि भूख की समस्या से निपटा जा सके।"

प्रधानमंत्री ने शिक्षा के अधिकार कानून के क्रियान्वयन के लिए राज्यों और केंद्र सरकार के बीच सहयोग की अपील की। इस कानून के तहत छह से 14 साल के बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने की व्यवस्था है।

उन्होंने कहा, "राज्यों के सहयोग से काम करते हुए केंद्र सरकार शिक्षा के अधिकार कानून के क्रियान्वयन के लिए पूरा प्रयास करेगी।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा और शोध विश्वविद्यालयों की राष्ट्रीय परिषद को स्थापित करने के लिए विधेयक संसद में पेश किया जाएगा।

बिहार के प्रतिनिधियों ने फिर किया हंगामा :-

प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान लगभग 11 बजे बिहार के प्रतिनिधियों ने हंगामा भी किया, जिसके चलते अधिवेशन स्थल पर लगभग 10 मिनट तक अजीबोगरीब माहौल बना रहा। पार्टी के नेताओं और सेवा दल के कार्यकर्ताओं को हंगामा कर रहे प्रतिनिधियों को शांत कराने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

बिहार चुनाव के नतीजों से नाराज इन प्रतिनिधियों ने केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री मुकुल वासनिक के खिलाफ नारेबाजी की और उनके खिलाफ पोस्टर पिचकाए व परचे भी बांटे। इन नेताओं ने वासनिक पर चुनाव के दौरान टिकट बेचने का आरोप लगाया।

महाधिवेशन में रविवार को भी बिहार विधानसभा चुनाव में टिकटों के बंटवारे के मुद्दे पर राज्य इकाई के प्रतिनिधियों ने जमकर हंगामा मचाया था।

वादे को निभाया :-

प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने मंदी के दौरान देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर रखने के वायदे को निभाया है। "हमने लोगों से वायदा किया था कि हम मंदी के समय की चुनौतियों से निपटेंगे और हमने अर्थव्यवस्था के किसी भी क्षेत्र को प्रभावित नहीं होने दिया। हमने काफी हद तक अपने वायदे को निभाया है।"

पाकिस्तान से मैत्रीपूर्ण रिश्ते की वकालत :-

उन्होंने पाकिस्तान के साथ मैत्रीपूर्ण रिश्तों की इच्छा जाहिर करते हुए पड़ोसी देश से अपने यहां मौजूद आतंकवादी ढांचों को नष्ट करने को कहा है। उन्होंने कहा, "हम पाकिस्तान से मैत्रीपूर्ण रिश्ते चाहते हैं, लेकिन ऐसा तभी सम्भव होगा जब हमारा पड़ोसी देश अपनी धरती पर भारत विरोधी गतिविधियां नहीं होना सुनिश्चित करेगा।"

उन्होंने कहा, "हम पाकिस्तान को शुभकामनाएं देते हैं।"

सोनिया की सराहना :-

प्रधानमंत्री ने अपने सम्बोधन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके साफ-सुथरे राजनीतिक नेतृत्व की भी जमकर सराहना की और कहा कि उनके नेतृत्व में काम करना सौभाग्य की बात है। "यह हमारी खुशकिस्मती है कि हम सोनिया गांधी के नेतृत्व में काम कर रहे हैं।"

उन्होंने कहा, "सार्वजनिक जीवन से भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए सोनियाजी ने कल हमारा रुख स्पष्ट किया कि हमें क्या करना चाहिए या हम क्या कर सकते हैं।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की उन्नति में कांग्रेस ने अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि सिर्फ कांग्रेस ही ऐसी राजनीतिक पार्टी है जो समाज के सभी वर्गो को साथ लेकर चल सकती है।

दिग्गी ने सराहा, तो विपक्ष ने नकारा:-

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने सोमवार को 2जी स्पेक्ट्रम मामले में प्रधानमंत्री के पीएसी के सामने उपस्थित होने के प्रस्ताव को साहसिक बताया और कहा कि इससे विपक्षियों के इस मामले की जेपीसी से जांच कराने के अभियान की हवा निकल गई है।

उन्होंने भाजपा पर चुटकी लेते हुए कहा कि भाजपा के नेताओं को अपने नेता और पीएसी के प्रमुख मुरली मनोहर की क्षमता पर भरोसा नहीं है।

इस बीच विपक्ष ने 2जी स्पेक्ट्रम मामले की जेपीसी से जांच कराने की मांग दोहराई है। भाजपा के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, "जब वह पीएसी के समक्ष पेश होकर किसी भी प्रश्न का जवाब देने को तैयार हैं तो..जेपीसी क्यों नहीं? जेपीसी एक संवैधानिक संस्था है। वह जानते हैं कि पीएसी की भूमिका सिर्फ एक सीएजी रिपोर्ट तक सीमित रहेगी। अन्य मसलों का क्या होगा? हर कोई स्पष्ट एवं पारदर्शी जांच तथा दोषियों के लिए दंड चाहता है। ऐसा सिर्फ जेपीसी से सम्भव है।"

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता डी. राजा ने भी कहा कि विपक्ष जेपीसी की मांग पर अडिग रहेगा। राजा ने कहा, "प्रधानमंत्री ने फिर से जेपीसी के गठन की सम्भावना से इंकार कर दिया है। मुझे समझ नहीं आ रहा कि ऐसा क्यों है। वह इसे विवादित मसला क्यों बना रहे हैं। जेपीसी घोटाले की गहराई तक जाएगी। मुझे नहीं लगता कि पीएसी, जेपीसी से बेहतर हो सकती है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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