भूटान में भारतीय अलगाववादियों के शिविर नहीं : थिनले

थिनले ने गुवाहाटी में संवाददाताओं से कहा, "मेरे देश में कोई भारतीय आतंकवादी शिविर या ठिकाने नहीं हैं और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी आतंकवादी भूटान में प्रवेश न कर सके।"

भूटान एक दशक से भी लम्बे समय तक असम और पश्चिम बंगाल के आतंकवादियों के लिए सुरक्षित स्थान रहा है, खासकर 'युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम' (उल्फा), 'नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड' (एनडीएफबी) और 'कमातापुर लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन' (केएलओ) को वहां पनाह मिलती रही है।

नब्बे के दशक के मध्य से लेकर 2003 तक भूटान इन तीनों समूहों का ठिकाना रहा है। वर्ष 2003 में भूटान ने भारतीय अलगाववादियों को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर एक सैन्य अभियान 'ऑपरेशन ऑल क्लीयर' चलाया था।

भूटानी सेना ने 30 आतंकवादियों को मार गिराया था और कम से कम 50 को भारत को सौंप दिया था।

भूटान की 605 किलोमीटर लम्बी बिना बाड़ वाली सीमा भारतीय पूर्वोत्तर राज्य असम से लगी हुई है।

थिनले ने कहा कि 2003 की कार्रवाई के बाद उनके देश में कोई आतंकवादी ठिकाने नहीं हैं। उन्होंने आतंकवाद से लड़ने की संयुक्त कार्रवाई में भारत को सहयोग देने की बात कही। उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग बढ़ाने की बात भी कही।

थिनले असम से लगे भूटान के जिलों की यात्रा पर थे और बाद में उन्होंने गुवाहाटी से भूटान के पारो के लिए उड़ान भरी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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