प्रधानमंत्री की पेशकश के बावजूद जेपीसी पर अड़ा विपक्ष
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, "जब वह पीएसी के समक्ष पेश होकर किसी भी प्रश्न का जवाब देने को तैयार हैं तो..जेपीसी क्यों नहीं? जेपीसी एक संवैधानिक संस्था है। वह जानते हैं कि पीएसी की भूमिका सिर्फ एक सीएजी रिपोर्ट तक सीमित रहेगी। अन्य मसलों का क्या होगा? हर कोई स्पष्ट एवं पारदर्शी जांच तथा दोषियों के लिए दंड चाहता है। ऐसा सिर्फ जेपीसी से सम्भव है।"
जावड़ेकर ने कहा, "विपक्ष की जेपीसी की मांग वैध है। हम यह मांग जारी रखेंगे। यह संसदीय माध्यम है। आप जेपीसी के लिए तैयार क्यों नहीं हैं? यह सीएजी रिपोर्ट के दायरे से बाहर भी जांच कर सकती है।"
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा)के नेता डी. राजा ने भी कहा है कि विपक्ष जेपीसी की मांग पर अडिग रहेगा। राजा ने कहा, "प्रधानमंत्री ने फिर से जेपीसी के गठन की सम्भावना से इंकार कर दिया है। मुझे समझ नहीं आ रहा कि ऐसा क्यों है। वह इसे विवादित मसला क्यों बना रहे हैं। जेपीसी घोटाले की गहराई तक जाएगी। मुझे नहीं लगता कि पीएसी, जेपीसी से बेहतर हो सकती है।"
मनमोहन सिंह ने बुराड़ी में कांग्रेस के 83वें महाधिवेशन में कहा कि वह पीएसी के समक्ष पेश होने को तैयार हैं। उन्होंने जेपीसी के गठन की सम्भावना से इंकार किया है।
उन्होंने कहा, "मैं ईमानदारी से इस बात पर यकीन करता हूं कि प्रधानमंत्री को संदेह से ऊपर होना चाहिए और इसीलिए मैं पीएसी के समक्ष पेश होने को तैयार हूं, हालांकि इसकी कोई मिसाल मौजूद नहीं है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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