कांग्रेस महाधिवेशन : आतंकवाद, भ्रष्टाचार और विपक्ष पर हल्ला बोल (राउंडअप)
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जहां अपने अध्यक्षीय भाषण में आतंकवाद और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर पार्टी के विचार प्रस्तुत किए वहीं युवा नेता राहुल गांधी ने विकिलीक्स के खुलासे पर चुप्पी साधते हुए भ्रष्टाचारियों को दंडित करने की बात कही। हाल के दिनों में अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहे पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह ने तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर जमकर हल्ला बोला। उन्होंने आरएसएस की तुलना जर्मन तानाशाह हिटलर तक से करने में कोई संकोच नहीं किया और देश में आतंकवाद के लिए भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा को जिम्मेदार ठहराया।
अधिवेशन में जारी कांग्रेस के 125वें वर्ष के संकल्प पत्र में सोनिया गांधी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा गया कि पार्टी युवाओं को अपनी विचारधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगी।
28 दिसम्बर को पार्टी की स्थापना के 125 वर्ष पूरे होने का जिक्र करते हुए इस संकल्प पत्र में देश के स्वाधीनता आंदोलन और स्वाधीनता के बाद इसके विकास में पार्टी के योगदान को याद करते हुए कहा गया कि कांग्रेस ने सफलतापूर्वक बहुआयामी चुनौतियों का दृढ़ता से सामना किया है।
संकल्प पत्र में पार्टी को मजबूती प्रदान करने वाले नेताओं महात्मा गांधी, जवारलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी को याद किया गया।
महाधिवेशन के दौरान हालांकि बिहार विधानसभा चुनाव में टिकटों के बंटवारे के मुद्दे पर राज्य इकाई के कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा भी मचाया जिसके चलते महाधिवेशन का माहौल कुछ समय के लिए गरमा गया।
महाधिवेशन के दूसरे दिन दोपहर बाद राजनीतिक प्रस्ताव पर चल रही बहस में हिस्सा लेने के लिए जैसे ही महासचिव मुकुल वासनिक उठे वैसे ही बिहार इकाई के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हंगामा आरम्भ कर दिया। इन कार्यकर्ताओं ने उन्हें बोलने देने से रोका और उन पर टिकट बेचने का आरोप लगाया। ज्ञात हो कि वासनिक को चुनाव के दौरान बिहार का प्रभारी बनाया गया था।
पार्टी के तीन दिवसीय 83वें महाधिवेशन को सम्बोधित करते हुए सोनिया ने सभी ज्वलंत मुद्दों पर पार्टी के विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद जैसा भी हो, वह खतरनाक होता है। भ्रष्टाचार को उन्होंने बीमारी बताया और इसके खिलाफ कड़ाई से पेश आने का आह्वान किया।
संसद में भाजपा के रुख की एक तरफ उन्होंने आलोचना की वहीं दूसरी तरफ कर्नाटक में भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा को गद्दी से न हटाए जाने के लिए उसे लताड़ भी लगाई। कार्यकर्ताओं की पार्टी में हो रही उपेक्षा पर भी उन्होंने ध्यान दिया और कहा कि केंद्रीय मंत्री जब भी अपने क्षेत्रों में जाए वह स्थानीय कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं को जरूर पूरा करें।
बिहार चुनाव की हार के मद्देनजर उन्होंने भविष्य के लिए एक मजबूत इच्छाशक्ति प्रदर्शित करने का आह्वान किया तो पार्टी की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने आत्मनिरीक्षण करने का भी सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि देश की पहचान धर्मनिरपेक्षता के प्रति गहरी व मजबूत प्रतिबद्धता वाले राष्ट्र के रूप में है और देश ने सभी प्रकार की साम्प्रदायिकता के खिलाफ संघर्ष किया है। उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का मतलब किसी धर्म का अपमान नहीं बल्कि सभी धर्मो का सम्मान होता है।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक कामों में पूरी तरह पारदर्शिता बरती जानी चाहिए और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने देश के युवाओं को अमूल्य ईंधन करार देते हुए उन्हें विकास के वाहन से जोड़ने की जरूरत पर बल दिया। साथ ही भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए उन्होंने दोषियों को कड़ी सजा दिए जाने की वकालत की। उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों व पार्टी शासित राज्यों से कार्यकर्ताओं के लिए थोड़ा समय निकालने का भी आग्रह किया।
राहुल ने कहा, "गांधीजी ने पहली बार हमें एक राष्ट्र के रूप में सोचना सिखाया। आजादी के बाद हमारे नेताओं ने इसे आगे बढ़ाया और विकास की नींव रखी। आज हमारे पास युवा आबादी के रूप में अमूल्य ईंधन है। ये विकास के वाहन से जुड़ने को तैयार हैं। मौका नहीं देने पर यह ईंधन बोझ बन जाएगा।"
उन्होंने कहा कि बगैर अवसर के आजादी बेमानी है। जब तक कि इसका एहसास कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति को न हो। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र कमजोर होता है तो अराजकता बढ़ती है।
राजनीति में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर उन्होंने कहा, "महिलाओं की भूमिका बढ़ी है। पंचायतों में उन्हें 50 फीसदी आरक्षण मिला है। अब हम महिलाओं को संसद में 33 फीसदी आरक्षण देने की तैयारी कर रहे हैं।" महाधिवेशन में मौजूद महिलाओं की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच उन्होंने कहा, "मैं भी घबरा रहा हूं कि कहीं मुझे अमेठी से हटना न पड़े।"
पार्टी कार्यकर्ताओं की शिकायतों की ओर ध्यान देते हुए राहुल ने कहा, "जमीनी कार्यकर्ताओं की कितनी सुनवाई होती है? जबकि वे सरकार व संगठन की कड़ी हैं। यहां कई केंद्रीय मंत्री व राज्यों के मुख्यमंत्री बैठे हैं। मैं उनसे बस इतना कहना चाहूंगा कि वे अपने व्यस्त समय में से थोड़ा सा समय कार्यकर्ताओं के लिए भी निकालें।"
राहुल ने कहा कि आम आदमी से जुड़े बिना सरकार तरक्की नहीं कर सकती। गांधी ने पार्टी में कार्यकर्ताओं को अवसर देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आम आदमी व्यवस्था से जुड़ नहीं पा रहा है। आम आदमी को पहचाने बगैर सरकार तरक्की नहीं कर सकती।
दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस महाधिवेशन में राजनीतिक प्रस्ताव पर बहस की शुरुआत करते हुए कहा, "राष्ट्रवादी विचारधारा के नाम पर आरएसएस मुसलमानों को ठीक उसी तरह निशाना बना रही है जिस प्रकार हिटलर ने 1930 में यहूदियों को निशाना बनाने के लिए की गई कार्रवाई को राष्ट्रवाद का नाम दिया था।"
उन्होंने कहा कि आरएसएस देश की नई पीढ़ी में मुसलमानों के प्रति घृणा के बीज बो रही है और "यह हमारे लिए सबसे बड़ा खतरा है।"
दिग्विजय ने कहा कि आरएसएस के लोग नौकरशाही और न्यायपालिका से लेकर सेना तक में घुस आए हैं। "वह चाहे मालेगांव विस्फोट हो या मक्का मस्जिद का या फिर समझौता एक्सप्रेस का, इन विस्फोटों में शामिल लोग हिन्दू संगठनों के ही क्यों हैं।" यहां तक कि शिशु मंदिरों में बच्चों को हिंसा का पाठ पढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, "ये लोग अफवाह फैलाने में बहुत ही माहिर हैं। देश की जनता को इनके झांसे में नहीं आना चाहिए। भाजपा व संघ के लोगों से डरने की भी जरूरत नहीं है। ये गीदड़ भभकी देते हैं। डंडा लेकर खड़े हो जाइए तो ये भाग जाएंगे नहीं तो ये लोग आपके सिर पर आ बैठेंगे। इसलिए इनका डटकर मुकाबला कीजिए।"
भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी पर निशाना साधते हुए दिग्विजय ने कहा, "बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना देश के इतिहास का सबसे काला अध्याय है। आडवाणी की रथ यात्रा के कारण ही देश में आतंकवाद की जड़ें मजबूत हुईं।"
दिग्विजय ने अपने सम्बोधन के दौरान भाजपा और नक्सलियों के बीच सम्बंध होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि आखिरकार नक्सलियों के गढ़ों में भाजपा ही क्यों जीतती है।
दिग्विजय ने कहा, "भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हाय तौबा मचाने वाली भाजपा की कर्नाटक के मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई की हिम्मत नहीं है। हिम्मत है तो कार्रवाई करे भाजपा। खामोश क्यों है वह। उन्होंने बेटे-बेटियों को जमीन की रेवड़ियां बांटीं। रेड्डी ब्रदर्स खुलेआम लूट कर रहे हैं। सुषमा स्वराज को रेड्डी बंधुओं से अपने रिश्ते साफ करने चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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