विपक्ष की नेता की तरह बोलीं सोनिया : गडकरी
एक विज्ञप्ति में गडकरी ने कहा, "सोनिया गांधी ने विपक्ष की नेता की तरह बोलते हुए सत्तारूढ़ पार्टी की नेता के तौर पर अपनी पूर्ण विफलता को छिपाने का प्रयास किया। उन्होंने वैसे ही सवाल उठाए जैसा कि संसद के बजट और शीतकालीन सत्र में विपक्ष ने कांग्रेस से पूछे थे। वह यह भूल गईं कि वह केंद्र में सत्तारूढ़ दल की अध्यक्ष हैं।"
उन्होंने कहा, "सोनिया ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग)-2 के कार्यकाल के दौरान सामने आए भ्रष्टाचार के मामलों पर जवाब देना उचित नहीं समझा। भाजपा मामलों की जांच संयुक्त संसदीय समिति से कराने की मांग कर चुकी है और संसद में गतिरोध के लिए सरकार को जिम्मेदार मानती है। सोनिया ने भाजपा की मांग को 'राजनीतिक ब्लैकमेल' कहा है। ऐसी भाषा का इस्तेमाल केवल देश में आपातकाल लगाने वाली कांग्रेस पार्टी ही कर सकती है।"
गडकरी ने कहा कि कांग्रेस इस समय मानसिक दबाव में है। यह सोनिया के भाषण में उनकी आवाज से ही पता चलता है। हमने देखा है कि ज्वलंत मुद्दों पर लोगों के सवाल का जवाब देने के बजाय वह उससे बचने का प्रयास करती हैं। कांग्रेस की स्थिति उस वक्त भी ऐसी ही हो गई थी, जब बोफोर्स का मुद्दा गरमाया था।
उन्होंने कहा, "सोनिया संप्रग-2 सरकार की विफलताओं से लोगों का ध्यान बंटाने का प्रयास कर रही हैं।"
गडकरी ने कहा कि भ्रष्टाचार, संप्रग-2 सरकार की विफलताएं, सरकार की जनता से बढ़ती दूरियां और कांग्रेस तथा उसके सहयोगी दलों में पनपता अविश्वास जैसे मुद्दों को भाजपा लोगों के सामने लाना चाहती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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